ध्यान यात्रा

“ये पहाड आध्यात्मिक स्पंदन से बहुत
जीवंत व सजीव है । कई जाने अनजाने गुरुओं ने इन पहाडों को अपना घर बनाया और इन जगहों को अपनी ऊर्जा से प्रदीप्त किया। हिमालय निश्चित ही सभी आध्यात्मिक जिज्ञासु के लिये एक आह्लादकारी अनुभव है।”
- सद्गुरु
“इससे पहले कि तुम बहुत कमजोर या बूढे हो जाओ तुम्हें प्रिय हिमालय से जरुर मिलना चाहिए और उसके साथ एकाकार करना चाहिये - यह मेरी कामना और आशीर्वाद है।”- सद्गुरु

हिमालय, जिसे आत्मज्ञानियों के वास-स्थान के रूप में पूजा जाता है, दुनिया भर के आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिये एक अति महत्वपूर्ण गंतव्य रहा है। कई आध्यात्मिक गुरुओं ने इन पहाडों को अपनी ऊर्जा से प्रदीप्त किया है। सद्गुरु ने हमेशा इन पवित्र पहाडों के प्रति गहरा लगाव महसूस किया है। इस रहस्यमय सम्बंध को दूसरों के साथ बांटने के प्रयास में ईशा फाउंडेशन, सद्गुरु की कृपा व मार्गदर्शन में, हर साल सितंबर/अक्तूबर के दौरान हिमालय पर्वत क्षेणी में ध्यान यात्रा का आयोजन करता है।

ध्यान यात्रा इन भव्य पहाडों की पवित्र ऊर्जा में नहाने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है। इसमें हिमालय के गढवाल इलाके की कुछ रमणीय और शक्तिशाली जगहों में दो हफ्ते की लंबी पैदल यात्रा और शिविर में रहना शामिल है।

नई दिल्ली पहुँचते ही यात्रा में भाग लेने वाले अपने बसों में बैठकर पहाडों की सफर पर निकलते है। बसों का पहाडों की पतली-पतली सडकों, बहते नदी-नालों, सीढीदार ख्रेतों और पहाडों की ढालानों पर ख्रतरनाक रुप से बसे गाँव के बीच हो कर चलने का नजारा अद्वुत होता है।

ध्यान यात्री कई पवित्र स्थलों के दर्शन कराते हैं: इनमें गौमुख्र, गंगा का उद्गम; केदारनाथ, जो आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिये अति महत्वपूर्ण है और जहाँ बारह में से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है; बद्रीनाथ, जो विष्णु के भक्तों के लिये महत्वपूर्ण स्थान है और जो अपने गरम पानी के प्राकृतिक झरनों की वजह से जाना जाता है; और हरिद्वार, जो दिव्य हिमालय का प्रवेशद्वार है।

बीच-बीच में सतसंग का आयोजन होता है, जैसे-जैसे सफर आगे बढता है पृथ्वी के अद्भुत प्राकृतिक दृष्यों का नजारा देखने को मिलता है, बर्फ से ढकी पहाडों की चोटियों के मघ्य हरी-भरी मनमोहक घाटियाँ। चेतना के उच्च स्तरों को अनुभव करने में तथा शरीर, मन और ऊर्जा के बारीक सम्बंध को महसूस करने में शक्तिशाली ध्यान और क्रियाएँ सहायक होती हैं तथा अंततः इन रहस्यमयी पहाडों की शक्ति और गुरु-कृपा का आह्वान करती हैं।



 
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