स्वयंसेवी
“जितनी गहराई से आप किसी और जीवन को स्पर्श करते हैं आपका जीवन उतना ही समृद्ध हो जाता है।”
- आर्शीवाद, सद्गुरु
ईशा संस्थान पूरी तरह लगभग स्वंसेवकों द्वारा चलाया जाता है। संस्थान व इसके विश्वव्यापी केंद्रों में किए गए हर एक कार्य और गतिविधि का आधार स्वयंसेवक ही होते हैं।
ईशा संस्थान का कार्य है हर इंसान में सर्व-व्याप्त ‘चैतन्य‘ को प्रकट करना। सद्गुरु इस पर जोर देते हैं कि चैतन्य जीवन के हर पहलू में विद्यमान है, और हाथ (कर्म योग), हृदय (भक्ति योग) एवं मस्तिष्क (ज्ञान योग) का मेल आंतरिक विकास के लिए सबसे प्रभावशाली सूत्र है। इस अंतर्राष्ट्रीय संगठन का प्रशासन 2,50,000 से भी ज्यादा स्वयंसेवकों को स्वार्थहीन कार्य के जरिए विकास करने का अवसर देता है।
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