ग्रामोत्सवम
ग्रामीण कायाकल्प कार्य और योजना का एक मुख्य कार्य तमिल नाडु के गाँवों को खेल और मनोरंजक गतिविधियों से परिचय कराना है।
वॉली-बॉल मैदान पर की गई दैनिक सभाओं के द्वारा बूढे और जवान ग्रामीणों, तथा सभी वर्गों और आर्थिक स्तरों से पुरुषों और महिलाओं को शामिल करके समुदायिक भावना को बढावा दिया जाता हैं। एकसाथ खेलने से प्रतियोगिता की स्वस्थ भावना को बढावा मिलता है, परिणाम स्वरूप आत्म-सम्मान में वृद्धि, सामुदायिक सदभाव में सुधार, बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
इसी भावना से प्रेरित होकर ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवक ग्रामोत्सवम व “ग्रामीण ओलंपिक” का आयोजन करते हैं। इस समारोह के माध्यम से, 7 जिलों में से 600 ग्रामीण टीम 13 से अधिक विभिन्न खेलों और पारंपरिक ग्रामीण खेलों में प्रतियोगिता करते हैं, जैसे सेलांबु अट्टम, एक प्राचीन मार्शल कला, रेकला दौड, बैलगाडी दौड प्रतियोगिता, तथा पुरुषों और महिलाओं के लिए रोमांचकारी वॉलीबॉल और थ्रोबॉल फाइनल। पूरे हफ्ते चलने वाले ग्रामोत्सवम में, मस्ती भरे ग्रामीण खेलों के साथ आधुनिक ‘ट्रैक एंड फील्ड‘ प्रतियोगिता में हर उम्र के दर्शकों को भाग लेने का अवसर मिलता हैं।
मगर, ग्रामोत्सवम में सिर्फ खेल ही नहीं होते, बल्कि यह दक्षिण भारत के ग्रामीण जीवन और संस्कृति का उत्सव मनाने का भी एक अवसर होता हैं। हर वर्ष, यह समारोह पारंपरिक ग्रामीण पाक शैली एवं स्थानीय कला और शिल्प को प्रदर्शित करता है, जबकि लोक गीत और नृत्य वहाँ पर उपस्थित 3,00000 से भी अधिक लोगोंको आनंदित करते हैं।
इन उत्सवों में महासत्संग भी शामिल हैं, जहाँ सद्गुरु एक विशाल सभा को संबोधित करते हैं उनकी दिव्य व अलौकिक वाणी, उनके साथ प्रश्नोत्तर और सामूहिक ध्यान प्रक्रिया लोगों को ग्रहण करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। ईशा फाउंडेशन की संगीत-लहरी, साउंड्स ऑफ ईशा के मुग्धकारी संगीत और शानदार आतिशबाजी के साथ ग्रामोत्सव संपन्न होता है।
यह वार्षिक महोत्सव तेजी से तमिल नाडु का सबसे लोकप्रिय उत्सव बन गया है, जो हर वर्ष बहुत बडी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है।