साउंड्स ऑफ ईशा
दिव्यदर्शियों ने हमेशा से ध्वनि का प्रयोग मात्र मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि उच्चतर आयामों की झलक प्रदान करने के लिए किया है। आसपास के जीवन से ली गई साधारण देहाती ध्वनियों में स्वर्गिक आयाम की साँस भरकर उसे दिव्य रूप दिया जाता है। एकतारे की एक साधारण झंकार ने अक्सर लोगों को उस तरह स्पर्श किया जो हजारों शब्द भी नहीं कर सकते थे।
साउंड्स ऑफ ईशा सद्गुरु के द्वारा गढे गए ‘संगीतकारों‘ का एक विलक्षण समूह है, जो अपनी गहरी चाहत और कृतज्ञता की भावना से प्रेरित हैं। उन प्रतिभावान और उत्साहित लोगों का कार्य अपने वाद्ययंत्रों के साथ गहराई में उतरकर सूक्ष्म संगीत पैदा करना है। आठ साल पहले अपनी पहली प्रस्तुति के साथ लंबा सफर तय करते हुए, आज साउंड्स ऑफ ईशा के कई एलबम हैं, साथ ही प्रशंसकों की एक बहुत बडी संख्या भी हैं। इस समूह के सदस्य ईशा फाउन्डेशन में पूर्णकालिक स्वयंसेवक हैं जो समर्पण और साधना का जीवन जी रहे हैं; इस प्रकार, उनके प्रेरक गीत आम तौर पर पूरे दिन की गतिविधि के बाद रचे जाते हैं, और अपने जुनून और उत्साह के कारण वे फाउन्डेशन के कार्य के एक अलग आयाम को बाँटना चाहते हैं।
उनकी धुनें संसार के विभिन्न हिस्सों के संगीत का मेल है जो सहज व निर्बाध रूप से सीमाओं एवं संस्कृतियों के पार फैल रही हैं। जहां इन गीतों का संगीत हमारे मन को भाता है और धुनें हमें मंत्रमुग्ध करती हैं, गीतों का वास्तविक औचित्य नित्य शांति के तत्व को हमारे अंदर डालना है जो इंसान के अंतर को छूता है।
सशक्त एवं मादक स्वर्गिक मिश्रण प्रदान करने वाले साउंड्स ऑफ ईशा की प्रस्तुतियाँ विशेष मानी जा सकती है, ये अस्तित्व की सूक्ष्म अवस्थाओं में जाकर सुनने वालों के लिए आंतरिक खोज का एक आधार बन जाती हैं।
Tइस समूह ने अनेकों WPO, YPO, UN और अन्य प्रसिद्ध सम्मेलनों में तथा 2006 में जहाने कुसरॉव महोउत्सव के अवसर पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। उन्होंने तालवाद्य में माहिर शिवमनी, सूफी गायिका जला खान और लोकप्रिय कलाकार रेमो फर्नांडिस के साथ 2007 और 2008 में हुए महाशिवरात्रि उत्सव पर भी कार्यक्रम प्रस्तुत किया था।