“मेरे लिए यह जीवन लोगों को उनकी दिव्यता का अनुभव कराने और उसे व्यक्त करने में उनकी मदद करने का एक प्रयत्न है। मेरी कामना है कि तुम इस दिव्य आनन्द को जानो।.” - सद्गुरु

सद्गुरु, हमारे समय के एक दिव्यदर्शी, योगी, युगद्रष्टा, मानवतावादी और एक अलग किस्म के आध्यात्मिक गुरु हैं। एक आधुनिक गुरु, जो जितनी गहराई से सांसारिक वस्तुओं से जुडे हैं उतनी ही गहराई से आंतरिक अनुभव एवं ज्ञान से भी जुडे हैं और निरंतर सभी के शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक कल्याण के लिए अथक कार्य कर रहे हैं। जीवन की प्रक्रियाओं के ऊपर सद्गुरु की दक्षता उनके गहन आत्मिक अनुभव का ही परिणाम है, जिससे वे जीवन के सूक्ष्मतर आयामों की खोज करने वाले लोगों का मार्गदर्शन करते हैं।

वे एक लंगोटी में भी उतने ही आरामदेह होते हैं जितने एक नीली जीन्स में होते हैं, या जितने एक विशाल हिमालय पर नंगे पाँव टहलते हुए, या राजपथ पर BMW की सवारी करते हुए। सद्गुरु अपने आप में एक अनूठे दिव्यदर्शी हैं जिनसे कोई मिल सकता है। सामाजिक रीतियों और धार्मिक कृत्यों से ऊपर उठकर सद्गुरु की आत्म-रूपांतरण लाने वाली वैज्ञानिक पद्धतियाँ बहुत सरल परंतु शक्तिशाली हैं। किसी खास परंपरा या मत से संबंध न रखते हुए, सद्गुरु योगिक विज्ञान का हमें एक ऐसा मिश्रण प्रदान कर रहे हैं, जो हमारे आधुनिक जीवन में बेहद प्रासंगिक है।

विश्व के कुछ सबसे प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय नेतृत्व मंचों पर सद्गुरु लोगों को संबोधित करते हैं। जनवरी 2007 में, सद्गुरु विश्व आर्थिक फोरम में चार पैनल्स में शामिल थे तथा कूटनीति और आर्थिक विकास, शिक्षा और पर्यावरण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रकट किए। वर्ष 2006 में, सद्गुरु ने विश्व आर्थिक फोरम, स्वीडेन में टॉलबर्ग फोरम और ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व रिट्रीट को संबोधित किया। इसके अतिरिक्त सद्गुरु संयुक्त राष्ट्र संघ मिलेनियम शांति सम्मेलन और विश्व शांति कांग्रेस का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

आधुनिक सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सद्गुरु की दूरदर्शिता और समझ के कारण बीबीसी, ब्लूमबर्ग, सीएनबीसी, सीएनएन और न्यूजवीक इंटरनेशनल जैसे चैनल उनका नियमित रूप से साक्षात्कार लेते हैं। सद्गुरु की अंतर्दृष्टि और ज्ञान को नियमित रूप से भारत के अनेकों मुख्य राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाता है। सद्गुरु जैसे सुविख्यात व्यक्ति को सुनने के लिए, उनकी सार्वजनिक गोष्ठियों और सत्संगों में अक्सर तीन लाख से भी ज्यादा लोग एकत्रित होते हैं।

प्राचीनता से अत्याधुनिकता तक सहज विचरते हुए, ज्ञात और अज्ञात के बीच एक सेतु बन कर, सद्गुरु अपने सान्निध्य में आने वाले हरेक व्यक्ति को जीवन के गहन आयामों को खोजने और उनका अनुभव करने का सामर्थ्य प्रदान कर रहे हैं।



एक सत्संग में सामूहिक ध्यान कराते सद्गुरु

 
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