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सवाल और जवाब
प्रश्न :
अगर हमें अपने बच्चों का पालन-पोषण करना है ताकि वे हमारी तरह विकृत न हों और बिगडे न, और समाज के गलत लोगों के प्रभाव में न आएँ, तो उनके लिए हमें किस तरह का परिवेश बनाना चाहिए?
सद्गुरु, मैं अपने चारों तरफ हर रोज इतनी सारी बीमारियाँ और पीडाएँ देखता हूँ। कई बार यह मुझे बहुत गहरे में छू जाता है कि एक मनुष्य को भला इस तरह से क्यों पीडत होना चाहिए। यह इतना अनुचित लगता है कि एक व्यक्ति अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेता है, जबकि वहीं दूसरा कष्ट में जीता है। क्या आप हमें यह बता सकते हैं कि यह बीमारी होती क्यों है? यह आखिर है क्या? यह आती कहाँ से है?
मैं जिन चिन्ताओं का अनुभव करता हूँ, उनमें से अधिकतर मेरे रिश्तों के माध्यम से आती हैं। दूसरे लोगों से थोडी समझदारी की आशा करना, क्या उचित नहीं है?
मान लीजिए कि मेरा किसी के साथ घनिष्ठ रिश्ता है और वह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, तो क्या मुझ उससे एक बेहतर समझदारी की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए?
सद्गुरु, विभिन्न प्रकार के बहुत सारे योग हैं, मैं यह कैसे जानूँगा कि मेरे लिए किस प्रकार का योग उत्तम है?
सद्गुरु, ऊर्जा का यह खेल जो मेरे भीतर चल रहा है, उसे मैं धारण नहीं कर पा रहा हूँ। इस पूरी प्रक्रिया में आप एक गुरु के रूप में कब आए?
सद्गुरु क्या वाकई ईश्वर है?
सद्गुरु मैं अपने मन से बहुत परेशान हूँ, आखिर इसकी मूल प्रकृति क्या है? मैं ऐसा क्या करूँ जिससे मैं जीवन की उच्च संभवना के प्रति और भगवद कृपा के प्रति अपने को तैयार कर सकूँ?
क्या मृत्यु के बाद जीवन होता है? मैं कुछ लोगों को जानता हूँ, जो एक माध्यम का प्रयोग करके मृतकों से बातचीत करते हैं। ये लोग जो माध्यम का काम करते हैं, वे भी ध्यान करते हैं। क्या ऐसा क्या ऐसा करना उचित है?
ईशा में, यह ध्यानलिंग क्या है, क्या वास्तव में इसकी जरूरत है? क्या आपका उपदेश ही काफी नहीं हैं?
सद्गुरु, यह ध्यानलिंग, जिसे आप एक ‘शाश्वत रूप’ बताते हैं, यह क्या है? मैं जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ।
आजकल वास्तु शास्त्र बहुत अधिक चर्चा में है। आप इसके बारे में क्या कहते हैं? आपने ध्यानलिंग मंदिर में किस हद तक वास्तु का पालन किया है? (श्रोता इस प्रश्न पर ताली बजाते हैं)
यहाँ भारत में कई पवित्र मनुष्य सूखे से राहत के लिए हवन और यज्ञ करते हैं, बाँझ औरतों को बच्चों से धन्य करते हैं, भूकम्प से बचाते हैं, इत्यादि। इसमें आपका क्या योगदान है और इन प्रथाओं के प्रति आपका क्या दृष्टिकोण है?
अपने भीतर चैतन्य को ढूँढने के लिए क्या यह जरूरी है कि सांसारिक मामलों से अलग हुआ जाए? क्या इसका अर्थ अपने उत्तरदायित्व से भागना नहीं है?
प्रिय सद्गुरु, सच्चा आनंद क्या है?
एक व्यक्ति की सफलता और असफलता का कारण क्या उसकी जन्मपत्रिका होगी? संख्या-विज्ञान के अनुसार नाम बदलने से क्या उसके सकारात्मक परिणाम होंगे?
एक गृहस्थ होकर साधना करना और एक ब्रह्मचारी बनकर साधना करने में क्या अंतर है?
प्रार्थना का क्या आधार है तथा बुरे समय में, लोगों का झुकाव ज्यादा प्रार्थना करने की ओर क्यों होता है?
सद्गुरु, भारत देश आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध है, और यह देश ऐसे कई आध्यात्मिक गुरुओं का साक्षी भी रहा है जिन्होंने मानव-जाति के उत्थान के लिए बहुत काम किया है। आज भी, आप हमारे बीच यहाँ मौजूद हैं तथा और भी कई अन्य गुरु हैं। फिर भी भारत की हालत इतनी बुरी है। ऐसा क्यों?
उन लोगों से प्रेम कैसे करें जिन से हमें सबसे ज्यादा चिढ होती है?
आज इतने सारे गुरु मौजूद हैं; वे सभी मुक्ति के नाम पर भिन्न-भिन्न चीजों का दावा कर रहे हैं। मैं यह कैसे जान सकता हूँ कि मेरे लिए सही गुरु कौन है?
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