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जिज्ञासुः क्या मृत्यु के बाद जीवन होता है? मैं कुछ लोगों को जानता हूँ, जो एक माध्यम का प्रयोग करके मृतकों से बातचीत करते हैं। ये लोग जो माध्यम का काम करते हैं, वे भी ध्यान करते हैं। क्या ऐसा क्या ऐसा करना उचित है?
सद्गुरु -
अब, मृत्यु के बाद जीवन। अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि यहाँ अपने जीवन को कैसे संभालना है। क्या तुम संसार में यह देख रहे हो? अधिकांश लोग, 99 प्रतिशत लोग नहीं जानते कि अपने जीवन की देख-भाल कैसे करनी है। ये लोग, मृत्यु के बाद जीवन के पीछे क्यों भाग रहे हैं? इसका क्या अर्थ है? मूलरूप से ये सारी बातें इसलिए हो रही हैं क्योंकि कहीं न कहीं लोग अमरत्व की तालाश में हैं। संसार में लाखों लोग अमरत्व की तालाश में हैं, हालाँकि उनमें से अधिकांश लोग यह भी नहीं जानते कि एक रविवार की सुबह क्या करना है (हँसते हैं)। है कि नहीं? उनमें से अधिकतर लोगों को, अगर एक अवकाश दे दिया जाए, अगर उन्हें अपनी दिनचर्या से अलग कर दिया जाए और अकेला छोड दिया जाए, तो वे यह भी नहीं समझ पाएँगे कि अपने साथ करें तो क्या करें। ये लोग अमरत्व की तालाश कर रहें हैं। जो लोग साठ-सत्तर साल यहाँ रहते हैं, वे नहीं जानते कि जीवन को कैसे संभालें। अगर वे सदा के लिए जीवित रह गए, तो वे एक झंझट बन जाएँगे! मृत्यु के बाद जीवन की चिंता मत करो। अगर तुम्हारे अंदर एक ऐसी स्थिति पैदा होती है जो खास स्मृतियों को जगाती हैं, अगर तुम्हारे लिए खास चीजें घटित होती हैं, तो उसे छोड दो। यही ठीक है।
ये सभी लोग जो माध्यम होने का दावा कर रहे हैं; उन्हें यह समझने की जरूरत है कि - मन के कई आयाम होते हैं। तुम जानते हो कि यह तुम्हारे साथ कई चाल चल सकता है। कितने ही भूत, शैतान, आत्माओं या कितने ही देवी-देवताओं की रचना कर सकता है। तुम सच में अपने मन के सहारे उन्हें वास्तविकता बना सकते हो। मन इन सारे भ्रमों को पैदा करने में बहुत ज्यादा सक्षम है। इसलिए यह मात्र मन का खेल है। यह एक मानसिक खेल है जिसे तुम अपने साथ खेल सकते हो और दूसरे लोगों के साथ भी खेल सकते हो। यह मानव जाति को किसी भी तरह से विकास की ओर अग्रसर नहीं करेगा। यह तो जीवन के साथ उलझने का केवल दूसरा ही तरीका है, तुम्हारे लिए अन्य प्रकार का मनोरंजन है, बस इतना ही है। यह एक चलचित्र की तरह है, एक दूसरा चलचित्र देखने की तरह है। इससे तुम्हारा किसी भी तरह का विकास नहीं होगा। मान लो कि तुमने मरे हुए पाँच लोगों से संपर्क किया, ठीक है? जब यहाँ इतने सारे लोग जीवित हैं और उन लोगों से तुम्हारा कोई संपर्क नहीं है, तो मृतकों से संपर्क करने में तुम्हें दिलचस्पी क्यों है? उन्हें अकेला छोड दो। कम-से-कम वो तुमसे मुक्त तो हैं। बस उन्हें अकेला छोड दो। जो लोग यहाँ हैं, उनसे तुम्हारा कोई संपर्क नहीं है, लेकिन कहीं और तुम्हारा संपर्क है, या तुम संपर्क बनाना चाहते हो। जो लोग मृतकों के माध्यम बने हुए हैं, उनसे निवेदन करो कि वे यहाँ माध्यम बनें, अपने चारों ओर के जीवन के लिए ताकि तुम भी यहाँ के जीवन से जुड सको।
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