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जिज्ञासुः सद्गुरु, यह ध्यानलिंग, जिसे आप एक ‘शाश्वत रूप’ बताते हैं, यह क्या है? मैं जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ।
सद्गुरु -
‘ध्यानलिंग’... यह क्या है? अगर तुम जीवन पर गौर करोगे तो आधुनिक विज्ञान यह बिल्कुल स्पष्ट रूप से कह रहा है कि संपूर्ण अस्तित्व सिर्फ एक ऊर्जा है, जो स्वयं को कई विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त कर रही है। बात केवल इतनी है कि यह ऊर्जा भिन्न-भिन्न स्तरों में अभिव्यक्त होती है। अगर हर चीज एक ही ऊर्जा है, तो क्या तुम हर चीज के साथ एक ही तरह का व्यवहार करोगे?
अभी-अभी हमने भोजन किया है। इतने किस्म के व्यंजन थे कि मैं देख्रकर हैरान रह गया। मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि क्या ख्राऊँ। मैंने मोमिता से कहा, “कृपया मेरे लिए चुनो।” विभिन्न किस्म के सैकडों व्यंजनों में से मैं चुनाव नहीं करना चाहता था। अब यह भोजन, जब तुम्हारी थाली में है, यह बहुत बढया, स्वादिष्ट और रुचिकर है। जो भोजन तुम करते हो, यह कल सुबह कहाँ चला जाता है? यह मल बन जाता है। यह स्वादिष्ट भोजन और वह मल, दोनों एक ही ऊर्जा हैं। जो भोजन तुम करते हो और जो यह बन जाता है, क्या तुम दोनों के साथ एक ही तरह का व्यवहार करते हो? जब यह मिट्टी में मिल जाता है, कुछ ही दिनों में यह पुनः भोजन के रूप में उग आता है। तुम इसे फिर ख्राते हो, फिर तुम अच्छी तरह जानते हो कि यह किस चीज में रूपांतरित हो जाता है। यह एक ही ऊर्जा है जो भिन्न-भिन्न रूप धारण करती है। यह रूप और वह रूप, दोनों में कितना विशाल अंतर है, है न? जब तुम मिट्टी को भोजन में रूपांतरित करते हो, तुम इसे कृषि कहते हो; जब भोजन को ऊर्जा में रूपांतरित करते हो, उसे पाचन कहते हो; जब पत्थर को ईश्वर में रूपांतरित करते हो, उसे प्रतिष्ठा कहते हो। ठीक इसी प्रकार, जिसे तुम सृष्टि कहते हो, यह वही ऊर्जा है - बहुत स्थूल से लेकर बहुत सूक्ष्म तक।
अगर मैं पीछे मुड कर देख्रूँ तो याद आता है कि कालेज समाप्त करने के बाद मैं कुछ पैसे कमाना चाहता था ताकि मैं भ्रमण कर सकूँ। इस उद्देश्य से मैंने एक मुर्गी-पालन फार्म शुरू किया। एक दिन मैंने दीवार पर रंग लगाने का निश्चय किया। ब्रश को पेंट में डुबोकर मैंने उसे दीवार पर लगाया। मैं पूरी दीवार को शुरू से अंत तक पेंट नहीं करना चाहता था, इसलिए मैंने ब्रश को बस दीवार पर रखकर उसे एक छोर से दूसरे छोर तक घसीटता गया। शुरू में पेंट बहुत गाढा था, फिर वह पतले से पतला होता गया और धीरे-धीरे गायब हो गया। मैंने देखा कि वह पेंट शुरू में तो बहुत गाढा था लेकिन फिर पतला होते-होते बस गायब ही हो गया। यह देखकर मेरे अन्दर मानो एक विस्फोट हुआ; मेरी आँखों से आँसू सहज बहे जा रहे थे। मैंने सिर्फ इस रंग की लकीर पर गौर किया और मुझे ऐसा एहसास हुआ मानो संपूर्ण अस्तित्व बिल्कुल वहीं था। संपूर्ण अस्तित्व बस यही है: रंग की एक लकीर की तरह। वास्तव में, यह गाढे और स्थूल रूप से शुरू होता है और पतला होता चला जाता है और फिर गायब हो जाता है। इसलिए निम्नतम से परम तक सब कुछ वहीं है, बस उस पेंट लगाने में ही, मेरे लिए विश्व रूप दर्शन था। वहाँ बैठकर मैं बावला हुआ जा रहा था, अंदर बहुत अधिक आनंद हो रहा था (हँसते हैं)। तीन दिन तक मैंने पेंट नहीं किया। उसके बाद मैंने फिर शुरू किया।
जिसे तुम अस्तित्व कहते हो, बस वह यही है। हर चीज वही ऊर्जा है। पत्थर वही ऊर्जा है। ईश्वर वही ऊर्जा है। यह स्थूल है; वह सूक्ष्म है। जैसे-जैसे तुम इसे सूक्ष्म से सूक्ष्मतर बनाते जाते हो, सूक्ष्मता के एक खास स्तर के बाद तुम इसे ईश्वर कहते हो। स्थूलता के एक खास स्तर के नीचे तुम इसे पशु कहते हो; उससे और नीचे तुम इसे निर्जीव कहते हो। यह सब बस वही ऊर्जा है। इसलिए, मेरे लिए यह संपूर्ण सृष्टि बस रंग की एक लकीर है, और अगर तुम इस पर गौर करोगे, तो तुम्हारे लिए भी यह ऐसा ही होगा। जिसे तुम ध्यानलिंग कह रहे हो वह ऊर्जा को सूक्ष्मतर से सूक्ष्मतर स्तरों तक ले जाने का परिणाम है। योग की संपूर्ण प्रक्रिया बस यही है, कम से कम भौतिक और अधिक से अधिक तरल, अधिक से अधिक सूक्ष्म बनना है। उदाहरण के लिए, समाधि वह अवस्था है, जहाँ शरीर के साथ कम से कम संपर्क रखा जाता है, बस एक बिन्दु मात्र जितना रह जाता है और शेष ऊर्जा मुक्त हो जाती है, अब वह शरीर के बंधन में नहीं रहती। एक बार जब ऊर्जा इस तरह से हो जाती है तो फिर उसके साथ बहुत कुछ किया जा सकता है। अगर ऊर्जा फँसी हुई है, शरीर के साथ पहचान बनाए हुए है, तो उसके साथ कुछ भी विशेष नहीं किया जा सकता। तुम उससे केवल विचार, भावनाएँ और भौतिक कार्य पैदा कर सकते हो - तुम बस इतना ही कर पाओगे; लेकिन एक बार जब ऊर्जा भौतिक पहचानों से मुक्त हो जाती है और तरल बन जाती है, उसके साथ बहुत सारी ऐसी चीजें की जा सकती हैं जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते।
ध्यानलिंग एक चमत्कार है। जब मैं चमत्कार कहता हूँ, मैं एक वस्तु को दूसरी वस्तु में परिवर्तित करने जैसे स्थूल कार्यों की बात नहीं कर रहा हूँ। अगर तुम जीवन से इस तरह से गुजर सको कि वह तुम्हें छूने न पाए, अगर तुम जीवन के साथ जैसे चाहो वैसे ख्रेल सको फिर भी जीवन तुम्हें किसी तरह से प्रभावित न कर पाए, जीवन तुम्हारे ऊपर कोई खरोंच न लगा सके, तब यह एक चमत्कार होगा और इसे ही हम कई तरह से हर व्यक्ति के जीवन में प्रकट करने के लिए कार्य कर रहे हैं। यही ईशा योग कार्यक्रमों का चमत्कार है। अगर कोई व्यक्ति उस चमत्कार को नहीं जान पाता है जो वह है, वह चमत्कार जो यह जीवन है, वह चमत्कार जो तुम्हें इस ग्रह पर थाम कर रख्रे हुए है, वह चमत्कार जो तुम्हें एक दिन मौत के घाट उतार देता है, वह चमत्कार जो तुम्हें पुनः जन्म दिलाता है; अगर कोई व्यक्ति इसे नहीं समझ पाता है, इसको अनुभव नहीं कर पाता है, ऐसा मूर्ख ही इस तरह के तुच्छ चमत्कारों या एक वस्तु को दूसरी वस्तु में रूपांतरित करने वाले तथाकथित चमत्कारों की ख्रोज करता फिरेगा। मूल रूप में, ये तथाकथित चमत्कार जीवन की प्रक्रिया के साथ दख्रल करते हैं। अगर तुमने जीवन को चख्रा है, अगर तुमने जीवन की गहनता को किसी रूप में जाना और अनुभव किया है, तो फिर तुम यह जानोगे कि इसके साथ दख्रल करना सबसे मूर्खतापूर्ण चीज है, क्योंकि तुम इसे और अधिक सुन्दर नहीं बना सकते। एकमात्र चीज जो तुम कर सकते हो वह यह है कि तुम स्वयं को जीवन के सौन्दर्य का अनभव करने दो, जीवन की भव्यता का अनुभव करने के लिए तुम बस राजी हो जाओ। इसके साथ कुछ और करना निश्चित रूप से एक मूर्खतापूर्ण कार्य होगा। अपनी समझ के सीमित दायरे में अगर तुम और कुछ भी करते हो, अपने जीवन के साथ कुछ और करने की चेष्टा करते हो, तो वह एक बहुत ही अपरिपक्व और बचकानी हरकत होगी। ध्यानलिंग को मैं एक चमत्कार कहता हूँ क्योंकि यह जीवन को उसकी गहनता में जानने की, जीवन को उसकी पूर्णता में जानने की एक संभावना है। ध्यानलिंग की ऊर्जा और मंडल, उस हर व्यक्ति के लिए एक संभावना पैदा करेगा जो इसके संपर्क में आएगा -चाहे वह वास्तव में इसके समीप आए चाहे सिर्फ ध्यानलिंग को अपनी चेतना में लाए - अगर वह स्वयं को ख्रोलने के लिए राजी है तो ध्यानलिंग उसके लिए एक संभावना पैदा करेगा। वह उसके लिए उपलब्ध होगा, वह उसके लिए परम संभावना बन जाएगा।
तुमने आधुनिक विज्ञान की सुख्र-सुविधाओं को जाना है; तो अब यह ध्यानलिंग क्यों? यह इसलिए है, क्योंकि मैं चाहता हूँ कि तुम एक दूसरे तरह के विज्ञान, आंतरिक विज्ञान, योग विज्ञान की शक्ति और मुक्ति को जानो, जिस के द्वारा तुम स्वयं अपने भाग्य के रचयिता बन सको। यह ध्यानलिंग इसीलिए है। इस तरह का विज्ञान स्वयं जीवन के ऊपर तुम्हें पूर्ण अधिकार प्रदान करता है। ध्यानलिंग की संपूर्ण प्रक्रिया बस इस विज्ञान को ऐसे प्रकट करने के लिए है कि इसे फिर कभी छीना न जा सके, इसको ऐसे प्रकट करने के लिए है कि हर इच्छुक व्यक्ति को यह हमेशा उपलब्ध रहे। न केवल तुम इस से अपने जीवन की इच्छानुसार रचना कर सकोगे, बल्कि तुम जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म की मौलिक प्रक्रिया को भी निर्धारित करने में सक्षम हो सकोगे। यहाँ तक कि तुम उस गर्भ का चयन भी कर सकोगे जिसमें तुम पैदा होने जा रहे हो; और अंततः अपनी इच्छा से विसर्जित होने में सक्षम हो सकोगे।
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