अपने भीतर चैतन्य को ढूँढने के लिए क्या यह जरूरी है कि सांसारिक मामलों से अलग हुआ जाए?...

जिज्ञासुः
अपने भीतर चैतन्य को ढूँढने के लिए क्या यह जरूरी है कि सांसारिक मामलों से अलग हुआ जाए? क्या इसका अर्थ अपने उत्तरदायित्व से भागना नहीं है?

सद्गुरु -

चैतन्य को ढूँढने के लिए, क्या तुम्हें सांसारिक मामलों से अलग होना चाहिए? जरा मुझे बताओ, तुम सांसारिक मामलों से अलग कैसे हो सकते हो? यह सब इस पर निर्भर करता है कि तुम सांसारिक मामला किसे कह रहे हो? अभी मैं इस नारियल के पेड की देखरेख कर रहा हूँ, क्या यह सांसारिक मामला है कि नहीं? बिल्कुल है। यह एक सांसारिक मामला है, है कि नहीं? मैं अपना खाना बना रहा हूँ, क्या यह सांसारिक मामला है? हाँ या नहीं? मैं अपने कपडे धोता हूँ, क्या यह सांसारिक मामला है? इसलिए तुम्हें इन सांसारिक मामलों को करना होगा। अन्यथा तुम यहाँ कैसे रहोगे?


तुम जिस तरह का सांसारिक कार्य करना चाहते हो वह तुम्हारा चयन है; वह तुम्हारा व्यक्तिगत चयन है। हर व्यक्ति को राजनीति से जुडने की जरूरत नहीं है, है कि नहीं? सामाजिक परिस्थिति में भी, कोई व्यक्ति राजनीति में है, कोई व्यक्ति एक कार्यलय में मात्र एक क्लर्क है, कोई व्यक्ति पूरा उद्योग चला रहा है, तो कोई व्यक्ति मात्र फर्श पर झाडू लगा रहा है। सभी लोग सांसारिक काम ही कर रहे हैं। इसलिए वास्तव में, तुम सांसारिक मामलों से अलग नहीं हो सकते। यह मात्र एक चुनाव है कि तुम अपने जीवन में किस प्रकार का सांसारिक कार्य करना चाहते हो और कितना करना चाहते हो। एक व्यक्ति को यह चुनाव करने की छूट क्यों नहीं होनी चाहिए? हर व्यक्ति को यह चुनने का अधिकार है कि उसे किस प्रकार का सांसारिक काम करना है और किस मात्रा में करना है, है कि नहीं? निश्चित तौर पर, हर व्यक्ति के पास यह विकल्प होना चाहिए। केवल वही लोग जो यह नहीं जानते कि वे अपने साथ क्या कर रहे हैं और बस वही किए जा रहे हैं जो बाकी सभी लोग करते हैं, वही लोग इस तरह की शिकायत करते हैं। वे बस वही करते हैं जो और सभी लोग कर रहे हैं। वे नहीं जानते कि अपने आप का क्या किया जाए। अपनी खुद की चीजों को करने के लिए उनके पास न तो बुद्धि होती है और ना ही जागरूकता होती है।

ऐसे लोग आध्यात्मिक लोगों के बारे में हमेशा शिकायत करते हैं। “अरे! ये लोग उत्तरदायी नहीं होते। ये लोग सांसारिक काम नहीं करते, बल्कि बस अपना ही काम करते हैं।” वह आदमी जो अपने ही घर में है, या अपने कार्यालय में है वहाँ भी वह केवल अपना खुद का ही काम करता है। संसार के कल्याण में उसकी दिलचस्पी नहीं है। वह वहाँ केवल अपने खुद के काम की भी परवाह करता है। वह यह नहीं जानता कि उसका वास्तविक कार्य क्या है और उसने अपने आपको इतनी बुरी तरह से उलझा रखा है कि वह यह भी नहीं जानता कि उससे बाहर कैसे निकला जाए। चूंकि वह उससे बाहर निकलने में सक्षम नहीं होता, वह सोचता है कि कोई व्यक्ति जो अपने मामलों को उस तरह से संचालित करने में सक्षम है, जिस तरह से वह अपने जीवन में उसे करना चाहता है, तो जिस हद तक वह उसे संभालना चाहता है, ऐसा लगता है वह गलत बस में है।

एक बार ऐसा हुआ। एक दिन, एक शराबी किसी तरह एक बस में घुस गया, यात्रियों के ऊपर लडखडाकर गिरता पडता, तो कभी अपने सूटकेस और सामान बिखेर देता, अचानक वह एक संभ्रांत बूढी महिला के बगलवाली सीट पर जा बैठा और उसके ऊपर गिर पडा। उस बूढी महिला ने उसे धक्का देते हुए कहा, “नौजवान, मुझे यह कहना तो नहीं चाहिए, लेकिन तुम सीधे नरक में जा रहे हो!” शराबी अचानक उछला और चौंककर बोला, “अरे नहीं! मैं तो गलत बस में चढ गया हूँ!” तो शराबियों को यह पता नहीं होता कि कौन गलत बस में है। अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन को उस तरह से व्यवस्थित करता है जिस तरह से वह चाहता है, उन सीमाओं तक, जहाँ तक वह चाहते हैं, तो वे लोग जिन्होंने अपने जीवन को अव्यवस्थित बना रखा है, वह अपने आसपास की परिस्थितियों में उलझे हुए और उनके दास बने हुए हैं, उनको बहुत ईर्ष्या होती है। वे हमेशा शिकायत करेंगे। वे कहेंगे कि ये लोग संसार से भाग रहे हैं। अभी, जिस तरह से यह दुनिया चल रही है, अगर बहुत से लोग इस पृथ्वी पर लगातार बहुत सारे कामों को कर रहे हैं, तो यह पृथ्वी और दस साल भी नहीं टिक पाएगी। अगर सभी छह अरब लोग अति-परिश्रमी बन जाएँ तो यह पृथ्वी और दस साल नहीं टिक पाएगी,। सौभग्यवश, पचास प्रतिशत लोग आलसी हैं। और जो अन्य पचास प्रतिशत हैं, ज्यादा परिश्रम कर रहे हैं, वे संसार को नष्ट करने में व्यस्त हैं। संभवतः हजार में केवल एक आदमी ही आध्यात्मिक है। हम उनमें से कम-से-कम पचास प्रतिशत लोगों को आध्यात्मिक बनाना चाहते हैं ताकि इस संसार को बचाया जा सके।

वे लोग जो अत्यधिक क्रियाशीलता से स्वयं को अलग कर रहे हैं, वे न तो अपने आपको, न समाज को, न संसार को, न पर्यावरण को, नाही इस पृथ्वी को, कोई नुकसान पहुँचा रहे हैं। केवल वही लोग जो पूर्ण अवचेतना में कार्य किए जा रहे हैं वो सचमुच इस संसार को नष्ट कर रहे हैं, है कि नहीं? पूरी अचेतन अवस्था में, यह बिना जाने कि वे क्या कर रहे हैं, किसी और व्यक्ति की अपेक्षा ज्यादा जल्दबाजी में, बस किसी की नकल करते हुए, वे लोग ज्यादा क्रियाकलाप किए जा रहे हैं। ये वही लोग हैं जो इस ग्रह पर सबसे अधिक नुकसान कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जो इस ग्रह के जीवन के लिए वास्तव में खतरा बने हुए हैं। ये वही लोग जो पूरी मानवता को भूमंडलीय आत्महत्या की तरफ ले जा रहे हैं। इसलिए, अभी इस संसार में सबसे उत्तरदायी कार्य जो तुम कर सकते हो, वह है क्रियाकलापों से अलग हो जाना। क्रियाकलापों से अलग होना इतना आसान नहीं है। मात्र चुपचाप बैठने के लिए अत्यधिक परिपक्वता की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए नहीं होता क्योंकि तुम आलसी और गैरजिम्मेदार हो, यह इसलिए होता है क्योंकि तुम जागरूक और सचेत हो।

 
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