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जिज्ञासुः आजकल वास्तु शास्त्र बहुत अधिक चर्चा में है। आप इसके बारे में क्या कहते हैं? आपने ध्यानलिंग मंदिर में किस हद तक वास्तु का पालन किया है? (श्रोता इस प्रश्न पर ताली बजाते हैं)
सद्गुरु -
यह क्या है? तुम लोग प्रश्न पर ही ताली बजा रहे हो? मैं प्रश्न के उलट-फेर को समझता हूँ। तुममें से काफी लोग अत्यंत खुश होंगे अगर मैं कहूँ कि हमने ध्यानलिंग मंदिर में वास्तु का अनुसरण किया है। हो सकता है कि मैं तुम लोगों को निराश कर दूँ। तमिलनाडु में एक प्रकार का वास्तु है और अगर तुम कर्नाटक में देखोगे, तो वहाँ भिन्न प्रकार का वास्तु है। कर्नाटक में भी अगर तुम पहाड की तरफ जाओगे तो वहाँ भी अलग किस्म का वास्तु है। मैदानों में भी यह भिन्न है। वास्तु क्या है? देखो, पुराने समय में, गाँवों में शिल्पकार नहीं थे। उदाहरण के लिए यह मान लो कि, एक आदमी अपने लिए घर बनाना चाहता है। तो वह ५० फुट लंबा और ५ फुट चौडा एक घर बनाता है। एक छोर पर दरवाजा है और वह खिडकी लगाना ही भूल गया है! अबर तुम इस तरह के घर में जाकर रहोगे तो तुम्हारे शरीर और मन का क्या होगा? यह सड जाएगा, है कि नहीं? अगर तुम हर समय दो दीवारों के भीतर इस तरह से रहोगे तो क्या तुम्हारा शरीर और मन क्षीण नहीं होगा? इसीलिए लोगों ने एक शास्त्र या मौलिक निर्देशनों को विकसित किया।
शास्त्र का अर्थ है मार्गदर्शन। अगर तुम एक घर बनाना चाहते हो, तो उसे खास तरह का होना चाहिए, जिस स्थान पर वह बनाया जा रहा है वह जगह मौसम के अनुकूल होनी चाहिए। अगर पश्चिम दिशा से धूप बहुत तेज आती है, तो पश्चिम दिशा की दीवारें ज्यादा मोटी होनी चाहिएँ। दूसरी तरफ की दीवारें थोडी पतली हो सकती हैं। वहाँ की परिस्थिति के आधार पर ही लोगों ने शास्त्र बनाए थे। लोगों ने कुछ हद तक इसका पालन किया और यह अच्छा था। यह मात्र शिल्पकला की विधि का नियम है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि घर अच्छी तरह से हवादार है। चूँकि हरेक गाँव में कोई शिल्पकार नहीं था, इसीलिए लोगों ने मकान-निर्माण के कुछ निर्देश बनाए, कुछ नियम बनाए ताकि अगर इन निर्देशों के अनुसार निर्माण किया जाए, तो यह अच्छा होगा।
भारत में विभिन्न प्रकार के वास्तु हैं। क्षेत्र के आधार पर निर्भर होकर लोगों ने उस जगह के लिए मार्ग-निर्देशन या वास्तु का निर्माण किया। केवल पिछले दस सालों में ही, लोग इसे चरम सीमा तक लेने लगे हैं। दस साल पहले, इस वास्तु का पालन असंगत सीमाओं तक नहीं किया जाता था। केवल पिछले आठ-दस सालों में, लोगों ने इसे बहुत बडा व्यवसाय बना दिया है। वास्तु तुम्हारे जीवन में आया इसका एकमात्र कारण यही है कि तुम भय में रहते हो, है कि नहीं? तुम हमेशा भय में रहते हो इसीलिए तुमने वहाँ शौचालय बना रखा है जहाँ पर रसोई होनी चाहिए और वहाँ रसोई जहाँ पर शौचालय होना चाहिए। लोगों ने इसे ऐसा ही बना रखा है, है कि नहीं? अब मैं सुनता हूँ कि लोग शौचालय में पानी की टंकी की दिशा भी बदल रहे हैं क्योंकि वास्तु कहता है कि उस दिशा में बैठकर शौच करने से लाभ होता है। यह हास्यप्रद है!
जब मैं पहली बार कोयंबतूर आया था, तब मुझे एक घर पर दिन के भोजन के लिए आमंत्रित किया गया था। वह एक बडा घर था। घर के अंदर एक छोटा सा बगीचा था-एक आंगन। एक सुन्दर घर था, लेकिन बगीचे के ठीक बीच में एक बहुत बडा ध्वजस्तंभ था। बिना किसी उद्देश्य के वह केवल वहाँ खडा था। मैंने घर की मालकिन से पूछा कि उन्होंने उस ध्वजस्तंभ को उस तरह से वहाँ क्यों रखा है। वह औरत मुझे बताने में संकोच कर रही थी। वह मुझे सच्चाई बताने में धबरा रही थी। उसने कहा, “अगर मैंने पहले ही ईशा योग प्रोग्राम किया होता, तो मैं ऐसा नहीं करती।” मैंने उससे पूछा, “यह क्या है?” उसने मुझे बताया कि जब से यह घर बना है उसे लगभग बारह साल हो गए हैं और वे लोग अभी तक अच्छी तरह से रह रहे थे, लेकिन मात्र छह माह पहले, एक वास्तु वैज्ञानिक उनके यहाँ आया था। वे लोग जो उन चीजों का पता लगाते हैं जिनका कोई अस्तित्व नहीं होता, वे बडे वैज्ञानिक माने जाते हैं, है कि नहीं? जो पहले से मौजूद है उस चीज को खोज निकालना, कौन-सी बडी बात है? हाँ, जो लोग उसकी खोज करते हैं जिसका अस्तित्व है, वो वैज्ञानिक होते हैं, लेकिन जो लोग उन चीजों की खोज करते हैं जिनका अस्तित्व ही नहीं है, वे बहुत बडे वैज्ञानिक होते हैं!
तो यह वास्तु वैज्ञानिक आया और बोला, “घर में सब कुछ ठीक है लेकिन घर का दक्षिण-पश्चिमी छोर शेष घर की तुलना में थोडी ज्यादा ऊँचाई पर होना चाहिए, जबकि आफ घर का उत्तर-पश्चिमी छोर ऊँचा है। अगर यह ऐसा रहेगा तो आपका पुत्र मर जाएगा।” उस औरत के दो बेटे थे। वैज्ञानिक यह कहकर चला गया। अब औरत काफी परेशान हो गई, लेकिन उसके पति जो एक डॉक्टर हैं, उन्होंने मानने से इनकार कर दिया। वे नहीं चाहते थे कि घर को गिराकर फिर से बनाया जाए। वैज्ञानिक ने इस परिवार को एक सप्ताह तक बौखलाने के लिए छोड दिया। उस एक सप्ताह में औरत अपनी भवनाओं का गट्ठर बन गई; वह लगभग पागल-सी हो गई। उसको ऐसे स्वप्न आने लगे जिनमें उसके बेटे नीचे गिरकर मर जाते हैं। कल्पना ने उसके मन में खलबली मचा दी। वह बुरी तरह से भयभीत हो गई थी। वह आतंकित हो गई कि उसके बेटे किसी भी क्षण मर सकते हैं। इसलिए एक सप्ताह के बाद वह वैज्ञानिक को वापस बुलाना चाहती थी। वह वैज्ञानिक जानता था कि उसने पहले जो कहा था, उसकी प्रतिक्रिया होने में कितना समय लगेगा। एक सप्ताह बाद, उस आदमी ने इन लोगों को फोन किया और इन्होंने वैज्ञानिक को आगे बढने और निर्माण के दुष्परिणाम से बचने के लिए कुछ करने को कहा।
उस आदमी ने कहा कि एक ‘परिहरम’ या निदान है, और इन लोगों से करीब बीस हजार रूपये वसूल किए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि बेटे न मरें उसने इसका बहुत ध्यान रखा, और लगभग 25 फीट लम्बा, एक विशाल ध्वजस्तंभ लाया। तब, परिवार के सदस्यों की सहायता से, बहुत कठिनाई से, उसे घर में लाया गया। केवल जब आप बहुत बडी कठिनाई का बहाना करते हैं, तभी अभिनय अपने चरम पर पहुँच पाएगा, है कि नहीं? वे लोग ध्वजस्तंभ को लाए और उसे प्रांगण में लगाया गया। इस ध्वजस्तंभ के कारण दक्षिण-पश्चिमी छोर ऊँचा हो गया और उन लोगों ने बेटे की जान बचा ली!
निश्चित रूप से, घर बनाने के पीछे एक विज्ञान होता है। हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुख-शांति को निश्चित करने के लिए, निश्चित तौर पर एक विज्ञान है, हमारा सामान्य कल्याण। ऐसा नहीं है कि वह नहीं होता, लेकिन भय के कारण, तुम इसे हास्यप्रद अनुपात में ले गए हो। यह भी एक विज्ञान है। मैं इससे इनकार नहीं कर रहा हूँ। अब लोगों ने स्थानीय वास्तु को छोड दिया है। वे चीन से कुछ चीजें आयात करने लगे हैं। अब तुम्हें अपने शौचालय को रसोई में बदलने की जरूरत नहीं हैं! वे शौचालय के सामने मात्र एक आईना लगा देते हैं। तुम अब शौचालय के अंदर ही रसोईघर को देख सकते हो! अगर वे लोग ऐसा करेंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। वे लोग तो और भी बुद्धिमान हैं। अब दीवारों को तोडने की जरूरत नहीं पडती। मात्र दर्पण और पत्थर बदलने से ही सब कुछ बिल्कुल ठीक हो जाएगा। तुम वह नहीं कर रहे हो जिसे करने की जरूरत है। तुम बहुत सारी अनावश्यक चीजों को किए जा रहे हो। तुम इस तरह की गतिविधियों में अपनी सारी ऊर्जा और बुद्धि व्यर्थ किए जा रहे हो।
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