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प्रश्नकर्ताः आज इतने सारे गुरु मौजूद हैं; वे सभी मुक्ति के नाम पर भिन्न-भिन्न चीजों का दावा कर रहे हैं। मैं यह कैसे जान सकता हूँ कि मेरे लिए सही गुरु कौन है?
सद्गुरु -
(हँसते हैं) मैं किसी चीज का दावा नहीं कर रहा हूँ और ना ही मैं तुम्हारा गुरु बनना चाहता हूँ। कोई भी गुरु - अगर वह वाकई गुरु है- वह कभी भी तुम्हारा गुरु बनने की इच्छा नहीं रखता। समझे? (हँसते हैं) ‘गुरु’ शब्द का अर्थ हैः ‘गु’ याने ‘अंधेरा’, ‘रु’ याने ‘दूर करने वाला’। तो, वह व्यक्ति जो तुम्हारे अंधेरे को दूर करता है, वह तुम्हारा गुरु है।
अब, वह तुम्हारे अंधेरे को दूर करता है, इसलिए नहीं क्योंकि वह तुम्हारा गुरु बनने की इच्छा रखता है, बल्कि इसलिए क्योंकि उसके अंदर आवश्यक प्रकाश होता है। अब तुम्हारा प्रश्न है, ‘ठीक है यहाँ ऐसे कई गुरु मौजूद हैं, पर मुझे कौन सा चुनना चाहिए?’ यह प्रश्न ठीक वैसा ही है जैसे, मुझे कौन सा साबुन इस्तेमाल करना चाहिए? लक्स, हमाम, निरमा - कौन सा? (हँसते हैं)
इसका निर्णय तुम नहीं कर सकते हो, यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसका तुम आकलन करो। लेकिन अभी आँकने की जरूरत है, क्योंकि यहाँ कई सारे लोग मौजूद हैं। मैं नहीं जानता कि इस स्थान पर वैसे कितने सारे लोगों ने प्रवचन किया है। (हँसते हैं) मुझे पता है कि वे टीवी के जरिये रोज तुम्हारे घरों में घुसते हैं और सभी प्रकार की बातों का दावा करते हैं, ज्यादातर समय वे तुम्हें सांत्वना प्रदान करते रहते हैं और तुम्हारी सीमाओं को प्रोत्साहित करते हैं।
अब समस्या यह है कि आज संसार में ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो लोगों को बस सांत्वना देने लिए बैठे हुए हैं। लोग सांत्वना चाहते हैं, इसीलिए सांत्वना दी जा रही है। जो लोग तुम्हें सांत्वना या मनोवैज्ञानिक राहत देते हैं उन्हें गुरु मत कहो, क्योंकि वे तुम्हें केवल तुम्हारे अज्ञान की गहाराई में ही ले जाएँगे। जो व्यक्ति तुम्हारी सीमाओं को प्रोत्साहित और पोषित करता है, तथा जो तुम्हें सुखद एहसास कराने की कोशिश करता है, वह निश्चित ही तुम्हारा गुरु नहीं है।
गुरु वह व्यक्ति है जो तुम्हें डराता है और तुम जिस तरह से हो उसको नष्ट करता है, ताकि तुम उस तरह बन सको जैसे सृष्टा तुम्हें चाहता था। अगर तुम अपने गुरु के साथ बैठने से खुश हो, अगर तुम बहुत आराम महसूस करते हो, तो वह तुम्हारा गुरु नहीं है क्योंकि वह केवल तुम्हारी सीमाओं को सहारा दे रहा है, तुम्हारी मर्यादाओं को संकट में नहीं डाल रहा है। अगर तुम उसके साथ बैठने में आतंकित महसूस करते हो, तुम जो हो वह उसकी उपस्थिति में अगर बेहद तुच्छ लगता है, अगर तुम जो हो उसकी उपस्थिति में काँपने लगता है, तो फिर वही तुम्हारा गुरु है। उसकी उपस्थिति में, तुम नहीं जानते कि क्या करना है, पर फिर भी सब कुछ घटित होता है, तब निश्चित रूप से वह तुम्हारा गुरु है।
अब, तुम किसी गुरु की खोज या चुनाव मत करो। तुम जानने की गहरी लालसा पैदा करो और तुम्हारे लिए गुरु आ जाएँगे। जिसे तुम गुरु कहते हो वह तुम्हारे लिए घटित होगा, क्योंकि गुरु कोई व्यक्ति नहीं है। गुरु एक खास स्पेस (रिक्त स्थान) - एक खास ऊर्जा या शक्ति होता है, वह बस तुम्हारे साथ घटित हो सकता है। वह कोई व्यक्ति नहीं है जिससे तुम मिलते हो, जिसके साथ हाथ मिलाते हो, जिसे प्रणाम करते हो, या जिसके पास जाकर तुम किसी चीज की याचना या प्रार्थना करते हो। वह स्थान या ऊर्जा जिसे तुम गुरु कहते हो, जब वह तुम्हारे साथ घटित होता है, वह तुम्हें विह्वल कर देगा। जो तुम्हारा अस्तित्व है, वह उसे नष्ट कर देगा ताकि तुम असीम बन जाओ। तुम उस तरह के बन जाओगे जैसा ईश्वर तुम्हें चाहता था।
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