सहभागियों का अनुभव
“जब मैं ईशा योग केंद्र पर आया था तब मैं छोटी सी दूरी भी आसानी से तय नहीं कर सकता था। चार हफ्ते ठहर कर लगातार ईशा योग अभ्यास करने के बाद, बस कुछ महीनों में ही मैं बाइपास सर्जरी करवाने से बच गया और वाकई मैंने ६ किमी की यात्रा तय की थी। मुझे लगता है कि यह केवल उपचार ही नहीं था जिसने मेरी मदद की थी; बल्कि यहाँ के वातावरण, भोजन, प्यार और लोगों की देखरेख ने मुझे अच्छा होने में बहुत मदद किया था”। ... एस. सदाशिवम, तमिल नाडु।
“एक सदमे के कारण मैं बोलने में असमर्थ था, और मेरे दोनों पैर व हाथ ठीक से काम नहीं कर रहे थे। मेरे चेहरे का बायां भाग सुन्न था। मैं ईशा योग केंद्र में २९ दिनों तक रहा जिससे मेरी बोली करीब ९५ प्रतिशत सुधर गयी थी। मैं सामान्य रूप से चलने में समर्थ हूँ तथा अपने दाएं हाथ को थोडे से सहारे से ही सीधा कर सकता हूँ, हिला सकता हूँ। संवेदनशून्यता भी काफी हद तक कम हो गयी है। मानसिक रूप से मैं ताजा महसूस करता हूँ”। ... एस. मोहनसुंदरम, उम्र 36 साल, तमिल नाडु।
“ग्लाकोमा (आँख की रोशनी कम हो जाना) के कारण मेरी कोई पार्श्व दृष्टि नहीं थी, और मेरी केंद्रीय दृष्टि बस 35 प्रतिशत ही थी। मैं चार हफ्तों के लिए ईशा केंद्र पर आयी थी। अब मैं काफी बेहतर ढंग से देख सकती हूँ, मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है.... क्योंकि डॉक्टरों ने कहा था कि इसका कोई इलाज नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि मैं संसार में सबसे खुश इंसान हूँ”। ... सुबथ्रा, उम्र 24 साल, तमिल नाडु।
“मैं घोडे से गिर गया था जिससे मुझे पिछले दस सालों से पीठ के निचले हिस्से में स्थायी रूप से तेज दर्द रहता था। मैंने एक्यूपंक्चर और रेकी जैसे संपूर्ण उपचार भी करवाए थे लेकिन उनसे भी कोई लाभ नहीं हुआ। मैं ईशा योग केंद्र पर सामान्य जीवन जीने की उम्मीद लेकर आया था, आराम करने के लिए नहीं आया था। मैं यहाँ दो हफ्तों तक रुका था। अब मेरी पीठ के निचले हिस्से का दर्द वकई कम हो गया है और पता नहीं क्यों मेरे भीतर एक तरह की शांति छा गयी है”। ... जॉर्डेन ग्वेनेल, उम्र ३० साल, पेरिस।