आषाढ (जुलाई-अगस्त) के महीने में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस पावन दिन पर प्राचीन वंशावली के अलौकिक गुरुओं को पूजा जाता है, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से संसार को धन्य किया तथा आंतरिक रूपांतरण की खोज करने वाले लोगों को आत्म ज्ञान प्रदान किया था। “गुरु” शब्द का अर्थ हैः वह जो अंधकार को दूर करता है। इस तरह से गुरु जिज्ञासुओं को अज्ञान के अंधकार से मुक्त करके ज्ञान के पथ पर ले जाते हैं।
सद्गुरु कहते हैं कि एक ‘गुरु’ नक्शे की तरह होता है; ऐसे शिक्षक के मार्गदर्शन के बिना एक व्यक्ति गंतव्य तक पहुँच तो सकता है, लेकिन बहुत लंबे समय के लिए भटककर खो भी सकता है। गुरु पूर्णिमा के दिन जिज्ञासु पारंपरिक रुप से गुरु के लिए अपना आभार प्रकट कर उनका आर्शीवाद प्राप्त करते हैं। गुरु पूर्णिमा को विशेष रुप से योगिक साधना और ध्यान करने के लिए एक लाभदायक दिन माना जाता है।