AIDS/HIV जागरुकता
UN और US AID-समर्थित सरकार के हाल के अनुमानों के अनुसार, भारत में HIV/AIDS के साथ जीवनयापन करने वाले लोगों की संख्या 2.47 लाख के खतरनाक स्तर पर है, साथ ही देश की 1.1 अरब से अधिक आबादी में HIV के संक्रमण प्रसार का स्तर करीब 0.36 प्रतिशत है।
ईशा संस्थान के AIDS जागरुकता कार्यक्रम में HIV/AIDS के प्रसार को रोकने के लिए कई स्तरों पर कार्यक्रम और अभियान चलाए जा रहे हैं जिसमें शैक्षिक, सामाजिक और चिकित्सा प्रयासों का एक बहु-आयामी उपक्रम शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के ऊपर विशेष ध्यान दिया जाता है।
संक्रमित लोगों को उचित देखरेख व उपचार प्रदान कराने पर ही कार्यक्रम का ध्यान केंद्रित है, और सबसे बढकर, संक्रमित लोगों को समाज में किसी तरह की उपेक्षा की दृष्टि से न देखा जाए और वे किसी हीनता का शिकार न हो इसके लिए समाज में स्वस्थ वातावरण को सुनिश्चित किया जा रहा है। इस परियोजना को संस्थान के ‘ग्रामीण कायाकल्प कार्य और योजना’ तथा इसके मोबाइल स्वास्थ्य क्लिनिक और स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों से बहुत लाभ प्राप्त होता है।
वास्तव में, वर्षों से, ईशा संस्थान ने मानव कष्ट के मुद्दे पर ध्यान देने के लिए खास क्षमता का प्रदर्शन किया है तथा व्यक्तियों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करने के लिए आवश्यक प्रेरणा, साधन और विधियाँ प्रदान की हैं। महत्वपूर्ण मानवीय मुद्दों और मानव कल्याण के सर्व-समावेशी आदर्श की रचना करने की ओर समाज के सभी वर्गों से समर्थन प्राप्त करने में भी यह संस्थान सफल हुआ है।
मुख्य रूप से चेन्नई में HIV/AIDS पर 18 से 19 नवम्बर, 2006 को आयोजित की गयी तीसरी अंर्तराष्ट्रीय इंटरफेथ कार्यशाला की कार्यवाही से लाभ उठाकर, ईशा संस्थान HIV/AIDS से पीडत व्यक्तियों के दुःख को कम करने के आम लक्ष्यों के प्रति निरंतर कार्य कर रहे विभिन्न समान रुचि वाले संगठनों और व्यक्तियों के साथ ठोस साझेदारी करने के लिए प्रयत्नशील है।