ईशा शिल्प
ईशा शिल्प, ‘ग्रामीण कायाकल्प कार्य और योजना’ की एक शाखा है, जहाँ पर श्रम ग्रामिणों की एक प्रेमपूर्ण भेंट है। ईशा शिल्प ग्रामीण लोगों की रचनात्मक प्रतिभा के लिए एक मंच प्रदान करने एवं जीविकोपार्जन के पारंपरिक रूप को बहाल करने पर ही मुख्य रूप से ध्यान देता है।
सिर्फ दो कारीगरों की टीम के साथ तीन साल पहले आरंभ हुआ ईशा शिल्प अब बढकर पचास कुशल पुरुषों और महिलाओं की मजबूत टीम बन गया है, जो कोयंबतूर में स्थित ईशा योग केंद्र के आस-पास के गाँवों से आते हैं, ये सभी लोग पर्यावरण अनुकूल उत्तम शिल्प वस्तुओं का उत्पादन कर रहे हैं। इन ग्रामीण शिल्पकारों का अंतर्निहित रचनात्मक हस्त कला-कौशल जिसे अब तक पहचाना नहीं गया था, उसे आधुनिक गृह सज्जा, उपयोगिता और फैशन उत्पादों की रचना करने के लिए ईशा डिजाइन टीम द्वारा कुशलतापूर्वक संगठित किया गया है।
स्थानीय वस्तुओं और प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए उत्पादों में पर्यावरण अनुकूल सजावटी टोकरियाँ, बहु-प्रयोजन ट्रे, लैंप, चटाइयाँ और कपास व जूट के सजीले हैंडबैग शामिल हैं। इनमें से हर उत्पाद इसकी पुष्टि करता है कि कैसे प्राकृतिक एवं पर्यावरण अनूकुल सामग्रियों को कुशलतापूर्वक आधुनिक कौशल के साथ आकर्षक डिजाइन के उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है। अनोखी पत्थर की मूर्तियाँ, रद्दी से बने यूरलिस और धातु शिल्प इंटीरियर डिजाइनरों एवं गृह निर्माताओं द्वारा समान रूप से पसंद किये जाते हैं।
अभी, कोयंबतूर के ईशा योग केंद्र व दुनिया भर के अन्य केंद्रों में आयोजित ईशा योग कार्यक्रमों के माध्यम से ईशा शिल्प अपने उत्पादों को बढावा दे रहा है, जबकि अभी हाल ही में, इसने मुख्य भारतीय शहरों में अपने उत्पादों को लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रदर्शनी आयोजित किया था। इन उत्पादों को पेशेवर डिजाइनरों व उपभोक्ताओं दोनों ने ही पसंद किया तथा साथ ही ईशा शिल्प ने 2006 में चेन्नई में आयोजित प्रसिद्ध सोसाईटी इन्टीरिअर कला व शिल्प प्रदर्शनी में श्रेष्ठ स्टॉल पुरस्कार भी जीता था।
अपने पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढती हुई मांग को पूरा करने के लिए, ईशा शिल्प अब भारत में तमिल नाडु के 2000 से अधिक गाँवों में ग्रामीणों को प्रशिक्षण देकर अपने उत्पादन को बढाने की योजना बना रहा है, जहाँ पर अपने सामाजिक आउटरीच कार्यक्रम - ‘ग्रामीण कायाकल्प कार्य और योजना’ के माध्यम से ईशा संस्थान पहले से ही सक्रिय है।
यह रचनात्मक पहल हमारे जीवन में शिल्प की सुंदरता, और ग्रामीण लोगों में कुछ नया कर दिखाने की आशा लाती है। ईशा शिल्प से प्राप्त आय ग्रामीण समुदायों के कल्याण में खर्च किया जाता है। विशेष रूप से, यह दक्षिण भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य क्लिनिक चलाने के लिए वित्त प्रदान करता है।