Tsunami Relief

सूनामी राहत और पुर्नवास कार्य

तमिलनाडु के तटीय राज्यों में, जहाँ ईशा फाउन्डेशन पहले से ही केंद्रों को संचालित कर रहा था, उसने 26 दिसम्बर 2004 को आए सूनामी के कारण हुई अपूर्व एवं अनर्थकारी मृत्यु और विनाश के लिए शीध्र कार्यवाही शुरू कर दी थी। चिदांबरम और कड्डलोर के तटीय क्षेत्रों तथा वेलेंकोविल और नागापट्टनम के उजडे हुए गाँवों में जीवन के सभी क्षेत्रों से आए हजारों स्वयंसेवकों ने पहले दिन से ही राहत शिविरों को चालू कर दिया था, और पीडतों को भोजन, आश्रय, उत्तम चिकित्सा सहयोग और मनोवैज्ञानिक राहत प्रदान कर रहे थे। विशेष रूप से बनायी गयी ईशा योग कक्षाएँ भी आयोजित की गयी जिसने पीडतों को शारीरिक व मनोवैज्ञानिक रूप से सुदृढ करके विपदा का सामना करने में सहायता की।

्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुर्नवास कार्यक्रमों में स्वयं भाग लेते हुए, Tsunami Relief प सद्गुरु करीब से पूरी कार्यवाही का निर्देशन करके उसका निरीक्षण कर रहे थे। अपनी चिकित्सा टीम और जरूरी सामान से लैस, आठ मोबाइल स्वास्थ्य क्लिनिक एवं हजारों स्वयंसेवक अपने परियोजना स्थल से तट के लिए तुरंत रवाना हो गए थे और जिला प्रशासन को कार्य के लिए सौंप दिया था।

जिला प्रशासन के साथ सकि्रय काम करने के साथ, ईशा फाउन्डेशन ने कड्डलोर जिले के चार गाँवों को अपनाकर आदर्श पुर्नवास कार्यक्रम को पूरा किया जिसे लाभ पाने वाले समुदायों और राज्य प्रशासन ने समान रूप से काफी सराहा। इसके अलावा, 60 तटीय गाँवों में ‘ग्रामीण कायाकल्प कार्य और योजना’ को चलाए रखने के लिए यह मोबाइल स्वास्थ्य क्लिनिक स्थायी रूप से लगाए गए।

ईशा फाउन्डेशन ने विपदा के 30 दिन के भीतर ही पीडतों को पहला स्थायी घर बना कर दिया था। सद्गुरु ने तुरंत नयी आवास रूपरेखा को विकसित किया, जो विविध संस्थाओं द्वारा आग, भूकंप, चक्रवात और सूनामी रोधक प्रमाणित की गयी। इससे और आगे, तटीय ग्रामीणों की एकमात्र आजीविका के पुर्नवास के लिए मछली पकडने वाली नावों की तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए एक नाव निर्माण कारखाना ईशा योग केंद्र परिसर में बनाया गया। स्वयंसेवक इंजीनियरों और व्यवसायियों ने विपत्ति द्वारा हुए आजीविका नुकसान की पूर्ति के लिए सहायता की।

ग्रीन हैंड परियोजना के माध्यम से एक विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम और हरे क्षेत्र का निर्माण कार्य भी शुरू किया तथा सूनामी से प्रभावित तटीय गाँवों में यह कार्य चल रहा है।

ईशा फाउन्डेशन के सूनामी राहत और पुर्नवास कार्य के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कृपयाwww.ruralrejuvenation.org/relief. देखें।

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“हमें समझना चाहिए कि विपत्ति क्या होती है। एक बडी लहर कोई विपदा नहीं है। विपदा मानुषिक हैं। जिन लोगों ने अपने परिवार को खो दिया है, उनके लिए यही विपदा है। किसी व्यक्ति ने अपनी जीविका खो दी है; किसी व्यक्ति ने अपना घर खो दिया है; बस यही विपदा है। किसी व्यक्ति के पास आज रात खाने के लिए कुछ नहीं है; यही विपदा है। अब, यह विपदा सिर्फ भौतिक स्तर पर नहीं है। एक इंसान का दुःख बाहर की अपेक्षा उसके भीतर बहुत ज्यादा होता है। शायद भोजन के कुछ पैकेट आ सकते हैं, और उसे खाने के लिए कुछ मिल सकता है; मगर, नई परिस्थितियाँ - जैसे कि उसे अपने घर में नहीं, सडक के किनारे बैठकर खाना पडे, और यह कि अब उसका परिवार नहीं रह गया है - इसका मानवीय भाग ही असली विपदा है”। - सद्गुरु



 
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