बाढ राहत कार्य
पूर्वोत्तर मानसून की 18 नवंबर 2005 से लेकर 25 नवंबर 2005 तक हुई बारिश ने तमिल नाडु के दक्षिणी जिले में सैकडों जिंदगियों पर कहर बरपाया तथा घरों और स्थानीय संरचना के लिए भारी नुकसान का कारण बनी। 500,000 से अधिक लोग अपने घरों से भाग गए थे व अपनी सुरक्षा के लिए घरों को खाली कर दिया था।
ईशा फाउन्डेशन ने 20 नवम्बर और 2 दिसम्बर 2005 के बीच, 45 ईशा डॉक्टरों और 350 ईशा स्वयंसेवकों के साथ,
प्रभावित क्षेत्रों में साजो सामान सहित 6 मोबाइल स्वास्थ्य क्लिनिक भेजकर तत्काल कार्यवाही की। फाउन्डेशन की ‘ग्रामीण कायाकल्प कार्य और योजना’ (ARR) परियोजना की चिकित्सा टीमों के साथ उपग्रह वाहनों ने कड्डलोर, चिदंबरम और त्रिची में 87 प्रभावित गाँवों के पीडतों को राहत पहुँचायी। मोबाइल स्वास्थ्य क्लिनिक की सेवाओं के जरिए, त्रिची के KAP विश्वनाथ मेडिकल कॉलेज के साथ 45 डॉक्टरों ने, 37,253 रोगियों की निःशुल्क चिकित्सा की। पानी और ताजा पकाए हुए भोजन के हजारों पैकेट वितरित किए गए। इसके अलावा पीडतों को चादरें, चटाइयाँ और स्कूल की वर्दी बाँटी गयी जबकि 1,000 से अधिक बच्चों को उचित पोषण प्राप्त हो यह सुनिश्चित करने के लिए- दिन में दो बार पीने के लिए दूध दिया गया।
विपदा वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण करके, ईशा फाउन्डेशन के स्वयंसेवकों ने दूर-दराज के गाँवों की पहचान की जिनको कोई राहत सहायता नहीं पहुंच रही थी। जल्दी ही, संस्थान के डॉक्टरों ने हर एक गाँव में जागरूकता अभियान आयोजित किए, जिसकी विशेषता थीः साफ पानी के स्त्रोत के अभाव में, बाढ के पानी का उपयोग करने से अपर्याप्त साफ-सफाई के खतरों की जानकारी देना। फाउन्डेशन के कई समर्पित और कार्य-कुशल स्वास्थ्य पेशेवर, कॉलेज के छात्र और स्थानीय लोग ईशा स्वयंसेवकों को सहयोग देने के लिए आगे आए, जिन्होंने एक दिन में लगातार बिना थके 12-13 घंटे काम किया।
सूनामी के बाद मानसिक आघात से राहत दिलाने के लिए खास तौर पर योग कक्षाओं को तैयार किया गया था जो अत्यंत कारगर साबित हुई थीं, ये योग कक्षाएँ उन ग्रामीणों के गहरे सदमे और बेबसी की अवस्था से मानसिक सुख-शांति बहाल करके सामान्य जीवन में उनकी वापसी में सहयोग करने के लिए आयोजित की गयी थी।