ध्यानलिंग योगिक मंदिर ध्यान करने का स्थान है। मंदिर के परिसर में हमेशा मौन कायम रखा जाता है।
यह मंदिर प्रतिदिन प्रातः 6:00 से रात 8:00 बजे तक सभी लोगों के लिए खोला जाता है। यह मंदिर वेलिंगिरी पर्वतों की तराई में ईशा योग केंद्र में है, जो कोयंबतूर से 30 किमी पश्चिम स्थित है। कोयंबतूर, दक्षिणी भारत में एक प्रमुख औधोगिक शहर है, जो हवाई, रेल और सडक मार्ग से अच्छी तरह जुडा हुआ है। और अधिक ~>
दैनिक कार्यक्रम
नाध आराधनाः ध्वनियों की एक अनोखी प्रस्तुति है जो दिन में दो बार की जाती है प्रातः 11:40 से दोपहर 12:10 तक और शाम 5:40 से शाम 6:10 तक। गुन्जित स्वरों, गीतों, गुनगुनाते कटोरों, ढोलों और अन्य वाद्य यंत्रों का यह अलौकिक मिश्रण मनुष्य को ध्यानलिंग की ऊर्जा के प्रति अधिक ग्रहणशील बनाता है।
ओंमकार दीक्षाः मंदिर पर आए दर्शनार्थियों के लिए शाश्वत ओंम (ऊँ) ध्यान में दीक्षित होने का एक अवसर है। नियमित रूप से इस सरल ध्यान का अभ्यास मनुष्य के शारीरिक व मानसिक संयोजन को मजबूत करके आश्चर्यजनक संतुलन और कुशलता लाता है। सार्वजनिक रूप से, यह प्रक्रिया हर रोज दोपहर 12:30 से दोपहर 1:10 के बीच अर्पित की जाती है।
मासिक कार्यक्रम
पंच भूत आराधनाः भौतिक काया सहित सारी सृष्टि का आधार पाँच तत्व ही हैं। मानव प्रणाली के भीतर पाँच तत्वों को शुद्ध करके शरीर और मन के कल्याण को निश्चित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया बाधा बनने के बजाए मनुष्य के परम कल्याण के प्रति एक सोपान बनने के लिए शरीर को तैयार करती है। योग की एक संपूर्ण प्रणाली को ‘भूत शुद्धि’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है तत्वों की शुद्धि। और अधिक ~>
अमावस्या और पूर्णिमा दिवसः योगिक परंपरा में, अमावस्या (नया चाँद) और पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) को विशिष्ट रूप से आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए अनुकूल माना गया है। इन दिनों की गई किसी भी साधना का मानव प्रणाली पर बहुत गहरा प्रभाव पडता है।
इन दिनों में, दर्शनार्थियों को व्यक्तिगत रूप से ध्यानलिंग पर दूध अथवा जल अर्पण करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। प्रातः 6:30 से दोपहर 12:30 तक दूध अर्पित किया जाता है तथा दोपहर 12:30 से रात 8:00 बजे तक जलार्पण किया जाता है।
चूंकि नए चांद की ऊर्जाएँ विशेष रूप से पुरुषों के लिए अनुकूल हैं, इसलिए अमावस्या रात्रि में प्रातः 1:00 बजे तक पुरुषों के ध्यान करने के लिए मंदिर खुला रखा जाता है, और उसी तरह, पूर्ण चंद्र का स्पंदन विशिष्ट रूप से महिलाओं के लिए अनुकूल है, इसलिए पूर्णिमा रात्रि में प्रातः 1:00 बजे तक महिलाओं के लिए मंदिर खुला रखा जाता है।
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वार्षिक कार्यक्रम
महाशिवरात्रि का त्योहार हर वर्ष रातभर चलने वाले लंबे सत्संग के रूप में मनाया जाता है जिसमें विशेषतः सद्गुरू की उपस्थिति में आयोजित रोचक एवं रंगारंग सांस्कृतिक समारोह के साथ आनंदमयी ध्यान बिखेरा जाता है। इस दिन यह विशेष संध्या एक साधक को नक्षत्रों की अनोखी स्थिति का उपयोग करने के लिए शक्तिशाली परिस्थिति उपलब्ध कराती है, जिससे चेतना के उच्च स्तर में विकास किया जा सके। और अधिक ~>
अर्पणः दर्शनार्थी अपने पसंदीदा दिन पर ध्यानलिंग को विभूषित करने के लिए हर रोज माला अर्पण करते हैं। मंदिर के स्वागत डेस्क पर अर्पण तिथि को पहले से आरक्षित किया जा सकता है। दर्शनार्थी फूल, धूप, और चिरागों के तेल भी भेंट कर सकते हैं, या सप्ताह के अंत में प्रसाद वितरण करने के लिए भी योगदान कर सकते हैं।
दूरभाषः (0422) 2515345 Email:
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