महाशिवरात्रि
ईशा योग केंद्र में हर वर्ष फरवरी/मार्च के महीने में महाशिवरात्रि मनायी जाती है। महाशिवरात्रि हमारे कल्याण के लिए प्रकृति की शक्तियों का उपयोग करने के लिए हमें एक अनोखा अवसर प्रदान करता है। योगिक विद्या में भी इस रात को ‘शिव की कृपा’ के रूप में मनाया जाता है, शिव को आदि गुरु माना जाता है जहाँ से योगिक परंपरा की शुरूआत हुई।
इस रात्रि में इस ग्रह के उत्तरी गोलार्थ की दशा कुछ ऐसी होती है, कि मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढती है। यदि एक व्यक्ति रात भर सीधे बैठकर, जागृत और सचेत रह सकता है, तो इससे मनोवैज्ञानिक एवं आंतरिक रूपांतरण संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति आती है। इसके अतिरिक्त, इस रात किए गए किसी योगिक अभ्यास के लाभ कई गुना बढ जाते हैं। इसी कारण योगिक परंपरा में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि की रात में किसी भी व्यक्ति को सोना नहीं चाहिए।
इस रात्रि की इसी विशेषता के कारण, ईशा योग केन्द्र में बडी धूमधाम और उत्साह के साथ महाशिवरात्रि मनाया जाता है। पूरे भारत और विश्व के हरेक कोने से आए तीन लाख से भी अधिक लोग रात भर मनाये जाने वाले इस उत्सव में सद्गुरु के सान्निघ्य का आनंद उठाते हैं।
इस वर्ष 2011 में, महाशिवरात्रि 3 मार्च, गुरुवार को मनाई जाएगी। ईशा योग केन्द्र मे महाशिवरात्रि का त्योहार, हर साल, सद्गुरु के साथ पूरी रात चलने वाले सत्संग के रूप मे मनाया जाता है। यह उत्सव पंच भूत आराधना के साथ शाम 5:40 बजे आरंभ होता है - जिसमें सद्गुरु की उपस्थिति में पांच तत्वों की भूत-शुद्धि होती है, सद्गुरु के प्रवचन व उनके द्वारा संचालित शक्तिशाली ध्यान प्रक्रियाएँ, विश्व के मशहूर संगीतकारों की प्रस्तुतियों के साथ, एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव की संभावना उपलब्ध कराते हैं।
आप अपने घर में महाशिवरात्रि पर क्या कर सकते हैं
महाशिवरात्रि, मंत्रों की शक्ति