कैदियों के अनुभव

 



“मैं योग कार्यक्रम आयोजित करने के लिए आपका धन्यवाद करता हूँ। मैं लंबे समय से योग का अभ्यास करता आ रहा हूँ और ऐसे सकारात्मक व सुव्यवस्थित कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिलने से प्रसन्न था। सरल और संक्षिप्त तरीके से प्रस्तुत की गयी जानकारी के कारण मेरे लिए यह कार्यक्रम लाभदायक था”। - स्कॉट रेनर्ट
 
“भीतर का अहम् जीवन को निष्फल कर देता है। मन का अहम् लोभ और क्रोध से भी बदतर होता है। ईशा योग केंद्र में सिखाए गए अभ्यासों ने मेरे भ्रम को नष्ट करके मुझे एक इंसान में रूपांतरित कर दिया है”। - के. मोहन राज
 
“मैं बहुत शांत और निश्चिंत महसूस करता हूँ। योग ध्यान एवं सद्गुरु के उपदेश सभी महत्वपूर्ण हैं। अब मैं ज्यादा निश्चिंत हूँ और मेरा दृष्टिकोण व मानसिक स्थिति कुछ ज्यादा ही सकारात्मक एवं स्वीकार करने वाली हो गई है”। - डेविड बियर
 
“ईशा योग कार्यक्रम ने प्रेम को समझने में मेरी मदद की है। आज के बाद हर चीज के लिए मेरा जवाब है मुस्कुराहट”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी
 
“मुझे लगता है कि मैं थोडा हल्का होने के साथ साथ थोडा और स्नेही व करुण हो गया हूँ। विश्वास प्रणाली और धर्म के विपरीत, यह योग एक व्यक्ति को अंतरात्मा में झाँकने और जीवन से ताल-मेल बनाए रखने की शिक्षा देता है”। - जैकरी क्रॉफर्ड
 
“अगर मैं इस सत्य को जानता तो मैं यहाँ कभी नहीं आता, लेकिन अगर मैं यहाँ नहीं आता तो फिर इस सच्चाई को कभी नहीं जानता”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी
 
“मुझे जीवन भर विद्रोही, क्रोधी और विरोधी माना जाता रहा। इस कार्यक्रम ने मेरे भिन्न-भिन्न एहसासों और मनोभावों को बेहतर रूप से व्यवस्थित करने में मेरी सहायता किया है। अगर यह कार्यक्रम मेरे लिए सहायक हो सकता है तो मुझे यकीन है कि यह उन लोगों के लिए भी सहायक हो सकता है जो इसी तरह की स्थितियों में हैं। इस कार्यक्रम को सुलभ बनाए रखिएगा”। - डैरिल ल्योंस
 
“अब मैं अपनी भावनाओं एवं निर्णय लेने की क्षमता पर बाहरी शक्तियों को हावी नहीं होने देता। मुझे एहसास हो गया है कि मैं अपने मन को जिस स्थिति में लाना चाहता था अब मेरा मन उसी स्थिति में पूर्ण नियंत्रण में है। जो बातें या जो चीजें मेरे नियंत्रण से बाहर थीं अब उन्हें स्वीकार करना ज्यादा सरल है। मुझे लगता है कि मैं एक इंसान बन गया हूँ, मुझमें काफी सुधार हुआ है”।
 
“मैं अपनी और संसार की ज्यादा परवाह कर रहा हूँ। मैं जीवित महसूस करता हूँ। मेरे लिए यह कार्यक्रम मुक्ति पाने का मार्ग है इससे कोई फर्क नहीं पडता कि मैं कहाँ हूँ। आप सभी ने थोडे से समय में ही मुझे बहुत कुछ दिया है। जो अभ्यास आपने मुझे सिखाए हैं उनसे मेरे जीवन में बहुत सकारात्मक अंतर आ रहा है। तो कृपया यह जान लीजिए कि आपके सिखाए हुए योग में निपुण होने के लिए मैं उत्तम प्रयास करूँगा। आप जो कार्य कर रहे हैं उससे यह संसार सच में एक बेहतर स्थान बन जाएगा। मैं आप सभी के लिए सफलता और खुशी की कामना करता हूँ। धन्यवाद”। - मार्क मॉम
 

“मुझे एक नया जीवन देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद”। - विलफर्ड केट्स

“अब यह स्थान मेरे लिए एक जेल नहीं है, बल्कि मैं इसका अनुभव एक ऐसे स्थान के रूप में करता हूँ जो मेरे जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह जेल कोई मृगतृष्णा नहीं है, बल्कि प्यास बुझाने की एक झील है”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“मैं यहाँ इसलिए आया था क्योंकि मैं छह दिन के लिए जेल से निकलना चाहता था, लेकिन इस योग ने मेरे जीवन के एक हिस्से को बदल दिया है। अब मुझे कम गुस्सा आता है”। - एडम डूरेन

“कुछ लोग ऐसे हैं जो समझते हैं कि जीवन जीने का एक खास तरीका भी होता है, और कुछ ऐसे भी हैं जो सोचते हैं कि वे मनमाने ढंग से जीवन जी सकते हैं। मैंने दूसरे का चुनव किया और जेल में आ धमका। इस आध्यात्मिक विज्ञान ने मुझे उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से जीने का तरीका दिखाया है”। - आर कुमार

“इस योग का अनुभव करने के बाद, मुझे समझ आया कि प्रेम और मनुष्यत्व जीवन में अद्वुत अनुभव ला सकते हैं”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“मेरी अंतरात्मा से मेरा संपर्क कराके जीवन के सोचने-समझने के भिन्न तरीकों को तलाशने में मेरी मदद करने के लिए आपका धन्यवाद”। - रियान ग्राहम

“मेरे मन में क्रोध और रंज की अतृप्त ज्वाला मिट चुकी है। योग के अभ्यास ने मन को शांत करने में मेरी सहायता की है एवं मुझे पथभ्रष्ट होने से भी रोका है”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“आपने मेरी अंतरात्मा से मेरा संपर्क कराके मुझे ईश्वर के करीब जाने के योग्य बनाने में मेरी सहायता की है इसके लिए मैं सदा आपका आभारी रहूँगा”। - फ्रांसिस हॉगटन

योग ने मेरी प्रतिशोध एवं बदले की भावना को रूपांतरित कर दिया है”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“मैं तनाव और क्रोध से निपटने की इच्छा से यहाँ आया था, अब मेरे तनाव का स्तर काफी नीचा हो गया है। अब मैं हर पल जीवन को जीता हूँ। एक नया जीवन आरंभ हो गया है। मैंने हर व्यक्ति से इस योग को करने की सिफारिश की थी। और यह कारगर सिद्ध हुआ है”। - स्कॉट सैली

“मानव कृपा के इस क्षीर के कारण, अब मेरा मन कपटहीन हो गया है जो कभी रोगग्रस्त था”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“आपने मेरी अपनी अच्छाई में विश्वास बनाए रखने, और मेरे पिछले कार्यो के लिए ज्यादा जिम्मेदार बनने में मेरी सहायता की है। मैं ज्यादा मुस्कुरा रहा हूँ तथा अंदर और बाहर बहुत ज्यादा निश्चिंत हूँ। यह एक अद्वुत अनुभव है तथा उस व्यक्ति के लिए बडा कार्यक्रम है जो सच्ची आंतरिक शांति चाहता है”। - ग्लेन एल बियर्ड

“मुझे कभी भी यह पता नहीं था कि ‘अनुभव’ क्या होता है। इस योग कार्यक्रम ने मुझे यह बताया कि कैसे महसूस करना है और प्रेम से बोलना है”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“अब मैं पहले से ज्यादा शांत हूँ तथा खुद पर पूर्ण नियंत्रण रखना भी सीख लिया है। जो मैंने सीखा है वह जीवन भर चलेगा”। - जेम्स मैलरी

“मैं ज्यादा विचारात्मक, और ज्यादा सचेत हूँ, तथा ज्यादा शांति से बातचीत करने एवं स्पष्टता से चीजों को देखने में समर्थ हूँ। मेरा मन भिन्न प्रकार से सोचता है, और मैं नई सोच के साथ हर चीज को देखता हूँ और अपनी प्रतिक्रिया देता हूँ”। - जिम्मी थॉमसन

“मैं जेल के दरोगा के लिए खाना बनाता हूँ। कई बार मैंने ऐसा महसूस किया कि उनके मुंह पर गर्म खाना फेंक दूँ। लेकिन अब उनके लिए मेरे मन में केवल प्रेम है, मैं सिर्फ प्रेम महसूस करता हूँ”। - कोयंबतूर सेंट्रल कैदी

“ईशा योग में सिखाए गए सिद्धांत सरल और व्यावहारिक ज्ञान हैं। यद्यपि सद्गुरु जग्गी वासुदेव चैतन्य स्वभाव और बुद्धत्व की बातें करते हैं, तो भी वह दृढता से व्यक्त करते हैं कि यह एक स्वाभाविक विज्ञान है। यह स्पष्ट था कि यह कार्यक्रम गैर-संप्रदायिक हैं तथा किसी धार्मिक सिद्धांत पर भी आधारित नहीं हैं। यह आत्म जागरुकता के जरिए सकारात्मक तरीके से जीवन तक पहुँचने का एक नया तरीका है”। - स्टीव इम्पेलिजरी

 
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