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जब एक व्यक्ति में गहराई से रूपांतरण होता है, तब प्रायः कविता ही भावों को व्यक्त करने का श्रेष्ठ तरीका होती है। वर्ष 1992 में ‘“कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’ कार्यक्रम शुरू होने के बाद से ही, ईशा संस्थान को कठोर अपराधियों द्वारा लिखी हजारों कविताएँ प्राप्त हुईं जिनमें उन्होंने अपने योग के अनुभव को लिखा था।
अजर-अमर
एक कलंकित अपराधी हूँ मैं
समाज से बहिष्कृत एक अछूत हूँ
फांसी के तख्ते का अंतिम अतिथि हूँ मैं
असंख्य सुभाषित वचनों से अबतक बेपरवाह
इस योग विज्ञान का ज्ञान मैंने आत्मसात किया
जिन लोगों को समझा अबतक अपना शत्रु मैंने
अब उनके लिए मैं मुस्कान बिखेरता हूँ
हमेशा अपने अंदर, कार्य और अस्तित्व में प्रेम लिए फिरता हूँ।
- वी. राधाकृष्णन, (मौत का अपराधी)
ब्लॉक ८, कमरा नंबर २५
सेंट्रल जेल, पलयमकोट्टई, तमिलनाडु, भारत
रोशन
सूरज की तरह तुमने अंधेरे दिलों को रोशन किया
ध्यान में दिव्य, तुमने मेरी बुराइयों को निर्मूल कर दिया
जीवन के सत्तर वर्ष समेट नहीं पाएँगे
इन सात दिनों के ज्ञान को
हाँ, अब मेरे जीवन में एक नया अर्थ जनमा है।
- सी. कनकावेल
नंबर ४५७९
रिमांड सेक्शन १, ब्लॉक ४
मदुरई सेंट्रल जेल।
मैं भगवान बन गया
जीवन की बगिया का एक फूल
एक सडे पत्ते में सिकुड गया,
अपने अंदर एक यात्रा, एक पुर्नजन्म है
एक अर्थहीन अस्तित्व का अंत हो गया
मैं ही प्रेम हूँ... वे कहते हैं भगवान प्रेम हैं
मैं भगवान बन गया... मैं भगवान बन गया!
प्रेम की शक्ति ने आत्मा को मुक्त कर दिया
यह फूल पुनः खिल गया
फूल से राख बनना, यह तो प्रकृति का नियम है
परंतु राख से फूल बनाना, चमत्कार है ईशा का।
- एन. मगुदेशवरन
अपराधी नंबर ७५६५९
कोयंबतूर सेंट्रल जेल, तमिलनाडु, भारत।
यह रूपांतरण
अभी जहाँ मैं हूँ वहाँ से
शुरू करके, अब अपने
अंदर पहुँचा मैं
अंतरात्मा में
यह जाना कि मैं हूँ
जो हूँ उसका कारण है
मैं कहाँ रहा और
मैंने क्या किया - मैं इसे तलाशता हूँ
यह संपूर्ण संतुष्टि
केवल उसके नियंत्रण से
आती है - जो असल में
मेरा अपना है
मेरा मन, हृदय, हाथ
और शक्ति - सर्वव्याप्त साहचर्य के साथ
मेरे जीवन का
तालमेल करा देंगे
मैं सचेत हूँ
और इस पल की
स्पष्टता में
मैं एक हूँ
- Russel Wm. Selby
कैदी नंबर AY832
SCI- डैलस, पेंसिल्वेनिया
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