कैदियों के लिए आंतरिक आजादी
‘कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’ भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में भिन्न-भिन्न स्थानों पर कैदियों के लिए आयोजित किए जाने वाला एक निःशुल्क कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से आजीवन कारावासी स्त्रियों और पुरुषों के अंदर आंतरिक रूपांतरण लाने की संभावना प्रदान करता है।
‘कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’ कार्यक्रम भारत में तमिल नाडु राज्य के कोयंबतूर सेंट्रल जेल से आरंभ हुआ था। उस मानवीय अंश को जिसे हम अक्सार भूल जाते हैं, उसे राहत पहुँचाने की सद्गुरु की चाहत ने 1992 में उन्हें आठ महीने का एक अभियान चलाने को प्रोत्साहित किया, जिसके परिणाम स्वरूप कोयंबतूर सेंट्रल जेल में पहले योग कार्यक्रम का आयोजन करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस शुरूआती संपर्क से, यह कार्यक्रम कैदियों और जेल अधिकारियों के बीच तेजी से फैल गया, जिन्होंने उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया भी जाहिर की थी। 67 आजीवन कैदी, जिनमें से कई कैदी जेल अधिकारियों के लिए अनुशासन और प्रबंधन संबंधी समस्याओं का कारण बने थे, सद्गुरु द्वारा सिखाए गए अभ्यासों से उनका भी रूपांतरण हो गया। जेल में अनुशासन संबंधी स्तरों में सुधार आया और जो रिश्तेदार कैदियों से मिलने आते थे उन्होंने भी सकारात्मक बदलावों को महसूस किया था। अब जेल अधिकारियों के अनुरोध पर तमिलनाडु की सभी जेलों में योग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।
आंतरिक रूपांतरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ‘कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’ योग कार्यक्रम उनके भावनात्मक एवं मानसिक संतुलन, जिम्मेदारी, स्वीकृति, और बात-व्यवहार संबंधि कौशल का विकास करने में मदद करते हैं, ताकि कैदी कारावास के दौरान अपने जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में उनका उपयोग कर सकें। इसके परिणाम स्वरूप जब कैदी रिहा होते हैं, तो यह कार्यक्रम समाज में उनकी सफल वापसी के संयोग को बढा देते हैं। इसमें भाग लेने वालों को आंतरिक मन में जाने के उपकरण दिए गए हैं, जिससे वे अपने हिंसक व्यवहार के जड को देख पाते हैं, और फिर वो तनाव और क्रोध का सामना करने के लिए वैकल्पिक विधियाँ सीखते हैं।
ये कार्यक्रम कैदियों को निरंतर चलने वाली योगाभ्यास करने की एक संभावना प्रदान करते हैं ताकि वे अपने शेष जीवन में स्वतंत्रतापूर्वक इस अभ्यास को नियमित रूप से कर सकें। योग कार्यक्रम में सिखाए गए अभ्यास संपूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि पर आधारित हैं। ये अभ्यास व्यक्ति की अंदरूनी ऊर्जा को संतुलित एवम् पूर्ण प्रवाह में बने रहने की संभावना प्रदान करते हैं, और अपने बाह्य परिवेश से बेफिक्र व्यक्ति को आंतरिक शांति और स्वछंदता में जीने की आजादी देते हैं। योग का अभ्यास दक्षिण भारतीय जेलों में हजारों कैदियों के लिए अद्भुत रूपांतरण लाया है। प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले हजारों कैदी जिनको कुछ समय पहले सबसे हिंसक अपराधी माना जाता था, उन्होंने अपने अंदर आए बदलावों को व्यक्त करते हुए, सद्गुरु और ईशा योग शिक्षकों को पत्र और कविताएँ भी लिखीं हैं।
‘कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’, जेल योग कार्यक्रम वर्ष 2002 में पहली बार दो अमरीकी कारागारों मे आयोजित किए गए थेः पहला है वेमार्ट में ‘पेंसिल्वेनिया डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शंस’ और दूसरा है केंटकी, लाग्रेंज में ‘लूथर लकेट करेक्शनल कॉम्पलेक्स’। सद्गुरु ने लगभग 50 प्रतिभागियों को दो कक्षाओं में योग सिखाया था, और एक बार फिर से कैदियों ने बहुत आश्चर्यजनक रूपांतरण का अनुभव किया था, जिससे वहाँ उपस्थित कुछ जेल-रक्षकों ने भी कहा कि क्या वो भी कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं। दोनों जेलों ने सद्गुरु से अनुरोध किया कि यह कार्यक्रम उस स्थान पर लगातार चलते रहें, तथा पेंसिल्वेनिया के अधिकारियों ने सद्गुरु से निवेदन किया कि पेंसिल्वेनिया राज्य की सभी 27 जेलों में इन कार्यक्रमों को किया जाए।
ईशा फाउंडेशन इस समय USA की जेलों में ‘“कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’ के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय समर्थन प्रदान कर रहा है, और लाभ-रहित संगठनों एवं सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर बडी संख्या में अमरीका की सुधारक सुविधाओं में कार्यक्रमों को आयोजित करके इस योजना का प्रसार करने के लिए सहायता की मांग कर रहा है।