जेल के कार्यक्रम
जब तक किसी व्यक्ति को सृष्टि के साथ अपने असीम संबंध का ज्ञान नहीं होता, तब तक हर व्यक्ति अपनी ही रचना में कैद होता है। बाहर निकलने की प्रतीक्षा होती है उसे। वह मुक्त होना चाहता है।
कोयंबतूर सेंट्रल जेल में आजीवन कैदियों के लिए पथ-प्रदर्शक कार्यक्रम करने के बाद, ईशा फाउंडेशन ने जेल महानिरीक्षक के अनुरोध पर दक्षिण भारत के अनेकों सेंट्रल जेलों में कार्यक्रम संचालित करने आरंभ कर दिए हैं।
भारत में कार्यक्रमों की सफलता के बाद, सद्गुरु ने संयुक्त राज्य अमेरिका में, पेंसिल्वेनिया और केंटकी के कुछ जेलों में भी ‘कैदियों के लिए आंतरिक आजादी’ कार्यक्रम का परिचय कराया।
परिणाम स्वरूप, जेल अधिकारियों और मिलने वाले संबंधियों ने कैदियों के व्यवहार करने के तरीके में स्पष्ट बदलाव महसूस किए, तथा अनुशासन के स्तरों में भी वास्तविक सुधार आए हैं।
जीवन रूपांतरण करने वाले ये कार्यक्रम कैदियों के हृदय को स्पर्श करते हैं तथा कैदियों को क्रोध और घृणा से मुक्त करके, उनको प्रेम, आजादी, और आनंद की अपनी स्वाभाविक स्थिति में विकास करने में मदद करते हैं।
दूसरे सभी जेलों तक इस संभावना को पहुँचाने के लिए ईशा फाउंडेशन अवसरों की तलाश करने के साथ साथ कोष भी जुटा रहा है। सद्गुरु कहते हैं कि, ““योग का अभ्यास व्याकुल मन को स्वच्छ करने और हृदय में शांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है”।
वर्षों से, इन कार्यक्रमों ने कई कठोर अपराधियों को साधु-संतों जैसे स्वभाव में रूपांतरित कर दिया है।