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NavBharat Times - Jan 13, 2012
पहले हम खुद नाचते-गाते थे, अब सिर्फ देखते हैं
पहले इस देश में साल के हर दिन के लिए कोई न कोई त्यौहार होता था | सब कुछ उत्सव का रूप लिटा था | आज जुताई का दिन है, तो उसे एक उत्सव बना दिया | कल रोपाई का दिन है, तो उसके लिए अलग किस्म का उत्सव | ...
NavBharat Times - Jan 09, 2012
अपने सपनों को स्थितियों का दास न बनने दें
अक्सर लोग उन्ही चीज़ों के पीछे भागते हैं , जो आसानी से हासिल हो जाएँ . ऐसा करते समय वे नहीं देखते कि उन्हें वाकई उसकी जरुरत है या नहीं , या फिर वे वाकई उसकी जरुरत है या नहीं, या फिर वे वाकई उसे अपनी जिंदगी में चाहते हैं या नहीं ...
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